पानीपत सिविल अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें होने के बावजूद केवल एक रेडियोलॉजिस्ट के कारण मरीजों को जांच के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

पानीपत। सिविल अस्पताल में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे उस समय खोखले साबित होते नजर आते हैं, जब मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए घंटों कतारों में खड़े रहते हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी मशीनें तो स्थापित कर दी गई हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां रोजाना दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अपनी जांच कराने के लिए कई-कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद केवल एक ही रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है, जिससे जांच कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इलाज में देरी मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है।

पानीपत सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की समस्या

अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव ने स्पष्ट किया कि एक डॉक्टर के लिए रोजाना आने वाले दर्जनों मरीजों और पोस्टमार्टम व अन्य सरकारी ड्यूटियों को एक साथ संभालना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। लैब ऑपरेटर सविता के अनुसार, अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 गर्भवती महिलाओं सहित 50 से अधिक मरीज जांच के लिए आते हैं, लेकिन डॉक्टर की सीमित उपलब्धता और अन्य कार्यों में व्यस्तता के कारण सबको सेवा नहीं मिल पाती। मरीजों का कहना है कि वे बार-बार अस्पताल आने के कारण आर्थिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं। कई बार गंभीर स्थिति होने के बावजूद उन्हें बिना जांच के ही लौटा दिया जाता है, जिससे उन्हें मजबूरन महंगे निजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग ने दिया समाधान भरोसा

सिविल सर्जन डॉ. विजय मलिक ने स्वीकार किया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही स्थिति में सुधार होगा। नई बिल्डिंग के शुरू होने पर वहां एक मशीन स्थानांतरित की जाएगी, जहाँ स्त्री रोग विशेषज्ञों को भी अल्ट्रासाउंड के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा, समालखा में भी आगामी एक महीने के भीतर सेवाएं बहाल करने की तैयारी है। फिलहाल, मरीजों को स्वास्थ्य विभाग के इन आश्वासनों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। यह देखना अहम होगा कि कब तक रिक्त पदों पर नई भर्तियां होंगी और कब तक मरीजों को बिना किसी परेशानी के सरकारी अस्पताल में बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना शुरू हो सकेंगी।