पानीपत का छोटा सा गांव मनाणा आज खो-खो खेल की बदौलत विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। यहां के सैकड़ों युवा और बेटियां खेल के दम पर शानदार सरकारी नौकरियां हासिल कर रहे हैं।

पानीपत। जिले के समालखा ब्लॉक का एक छोटा सा गांव मनाणा आज केवल खेती-किसानी के लिए ही नहीं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी अपनी एक नई अनूठी पहचान बना रहा है। यह गांव आज मुख्य रूप से खो-खो खेल की बदौलत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ा रहा है। कभी जहां बेटियों के खेल मैदान में उतरने पर सामाजिक संकोच होता था, वहीं आज इस गांव की होनहार बेटियां भारतीय खेल टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। तत्कालीन सरकारी स्कूल की प्रधानाचार्या सरिता, कोच रविंद्र सैनी और स्वर्गीय रामस्वरूप राठी के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीणों की पुरानी सोच बदली और आज यह पूरा क्षेत्र खेल क्रांति का बड़ा केंद्र बन चुका है।

खो-खो खेल से बदली गांव की तस्वीर

मनाणा गांव की होनहार खिलाड़ी मुकेश ने साल 2010 में खो-खो खेलना शुरू किया था। अपनी कठिन मेहनत के दम पर उन्होंने साल 2016 और साल 2019 की साउथ एशियन खो-खो चैंपियनशिप में भारत का शानदार प्रतिनिधित्व किया। वह अब तक कुल 26 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पदक जीत चुकी हैं और वर्तमान में वह जूनियर कोच के पद पर कार्यरत हैं। इसी तरह गांव की एक अन्य खिलाड़ी सविता ने भी साल 2010 से इस खेल की शुरुआत की थी। वह अब तक 10 से 15 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर लोक निर्माण विभाग में सरकारी नौकरी हासिल कर चुकी हैं। वर्तमान में अक्षरा और अवनी जैसी नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी लगातार पदक जीतकर आगे बढ़ रहे हैं।

खिलाड़ियों को मिल रहा सरकारी सहयोग

गांव के मुख्य खो-खो कोच रविंद्र सैनी साल 2010 से ही बच्चों को सुबह और शाम कठिन प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन के कारण आज मनाणा गांव के लगभग 90 प्रतिशत घरों में खो-खो के बेहतरीन खिलाड़ी तैयार हो चुके हैं। मैदान पर रोजाना 100 से 150 बच्चे नियमित अभ्यास करते हैं और अब तक गांव के 20 से 25 खिलाड़ी खेल कोटे से शानदार सरकारी नौकरियां भी पा चुके हैं। खिलाड़ियों की बेहतरीन डाइट और प्रशिक्षण के लिए सरकार द्वारा गांव में लड़कों और लड़कियों की अलग-अलग खेल नर्सरियां भी सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। यह खेल गांव में सामाजिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की एक बहुत बड़ी मिसाल बन चुका है।