अतीश दीपंकर, भागलपुर। नगर परिषद सुल्तानगंज हत्याकांड में घायल सभापति राज कुमार गुड्डू का 6 दिन पहले निधन हो गया था। गोलीकांड में घायल होने के बाद से पटना के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इसी बीच आज गुरुवार (14 मई) को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव अपने कार्यकर्ताओं के साथ मृतक नगर सभापति राज कुमार गुड्डू के आवास पर पहुंचे और उनके तैलचीत्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
सांसद ने परिजनों को बंधाया ढांढस
इसके बाद सांसद पप्पू यादव ने मृतक सभापति के परिजनों से भी मुलाकात की। सांसद ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने पूरी घटना को लेकर मृतक राज कुमार गुड्डू की माता, पत्नी व सहयोगीयों से जानकारी ली। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक और स्थानीय कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
पप्पू यादव ने की फांसी के सजा की मांग
पप्पू यादव ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि, सुल्तानगंज में पहले से ही अपराधियों का राज रहा है। सरकार अपराधियों का साथ दे रही है। वायरल फोटो में लोजपा नेता, भाजपा नेता, जदयू नेता के साथ अपराधियों का फोटो देखा जा रहा है। उन्होंने ऐसे अपराध करने वालों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से स्पीड ट्रायल चलाते हुए फांसी की सजा देने की मांग की है।
सरकारी कार्यालय में घुसकर हत्या
बता दें कि यह पूरी घटना बीते 28 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे की है, जब सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में सामान्य कामकाज चल रहा था। चेयरमैन राजकुमार गुड्डू और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण एक बैठक में व्यस्त थे। इसी दौरान मजदूरों के वेश में 5 अपराधी कार्यालय में दाखिल हुए। अपराधियों ने झोले में हथियार छिपा रखे थे। चैंबर में घुसते ही उन्होंने राजकुमार गुड्डू को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी। बीच-बचाव करने आए अधिकारी कृष्णा भूषण को अपराधियों ने बाहर खींचकर गोली मार दी, जिससे उनकी तत्काल मौत हो गई।
राजकुमार गुड्डू ने 11 दिन बाद तोड़ा दम
वहीं, बीच-बचाव करने के प्रयास में नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 दिनों से पटना के मेदांता अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद उनकी मौत हो गई। उनके सिर और सीने में गोलियां लगी थीं।
100 करोड़ की जमीन को लेकर था विवाद
इस दोहरे हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह वर्चस्व की लड़ाई और करोड़ों की जमीन बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी, डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी का पति रामधनी यादव था। रामधनी की नजर अजगैबीनाथ ट्रस्ट की करीब 50 एकड़ जमीन पर थी, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। चेयरमैन राजकुमार गुड्डू इस अवैध कब्जे का लगातार विरोध कर रहे थे। इसके अलावा, नगर परिषद के टेंडरों को लेकर भी दोनों के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी।
एनकाउंटर में ढेर हुआ मुख्य आरोपी
हत्याकांड के बाद पुलिस के बढ़ते दबाव को देख मुख्य आरोपी रामधनी यादव ने अपने गुर्गों के साथ 28 अप्रैल की रात ही थाने में सरेंडर कर दिया था। 29 अप्रैल की सुबह, जब पुलिस उसे हथियार बरामदगी के लिए ले गई, तो उसने और उसके गुर्गों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें रामधनी यादव को गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मुठभेड़ में डीएसपी नवनीत कुमार समेत तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

