पटना। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और बिहार राज्य महिला आयोग के बीच विवाद गहरा गया है। महिलाओं के राजनीतिक करियर पर दिए गए अपने विवादित बयान के बाद, पप्पू यादव ने अब आयोग द्वारा जारी नोटिस को ‘पक्षपातपूर्ण’ और ‘निराधार’ करार दिया है। उनके वकील ने आयोग में औपचारिक जवाब दाखिल करते हुए इस पूरी प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है।

​कानूनी वैधता पर खड़े किए सवाल

​पप्पू यादव की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि बिहार राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा 10(एफ) के तहत आयोग को स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, नोटिस और संज्ञान दो अलग बातें हैं। जवाब में तर्क दिया गया कि जो व्यक्ति शिकायतकर्ता बनता है, वह स्वयं न्यायाधीश नहीं हो सकता, क्योंकि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

​नोटिस को बताया जल्दबाजी में लिया गया फैसला

​सांसद ने आरोप लगाया कि आयोग ने बिना पर्याप्त तथ्यों के जल्दबाजी में यह कदम उठाया है। नोटिस में न तो उस वीडियो की तारीख का जिक्र है और न ही उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जानकारी दी गई है जहां यह बयान प्रसारित हुआ था। पप्पू यादव का कहना है कि उन्होंने हमेशा महिलाओं का सम्मान किया है और उनकी लड़ाई उन भ्रष्ट राजनेताओं के खिलाफ है जो महिलाओं का शोषण करते हैं।

​क्या था विवादित बयान?

​पूरा मामला 20 अप्रैल का है, जब पप्पू यादव ने कहा था कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड से शुरू होता है। इस बयान पर भारी बवाल हुआ था। इसके बाद बिहार राज्य महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजकर 3 दिनों में जवाब मांगा था और संतोषजनक उत्तर न मिलने पर लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करने की चेतावनी भी दी थी।

​आयोग की अगली तैयारी

​बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा ने पुष्टि की है कि पप्पू यादव के वकील का जवाब प्राप्त हो गया है। फिलहाल इस जवाब को विधि परामर्शी के पास भेजा गया है। आयोग कानूनी पहलुओं के आकलन के बाद ही तय करेगा कि आगे क्या कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि शुरुआत में पप्पू यादव ने नोटिस को कूड़ेदान में फेंकने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने कानूनी जवाब पेश कर दिया है।