चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के अनुसार कैदियों के पास अगर मोबाइल फोन मिलता है, तो इससे उन्हें पैरोल देने की अनुमति न दी जाए ऐसा नही हो सकता है। यह निर्णय किसी भी कैदी के लिए बहुत सख्त होगा। जब तक कोई भी आरोपी का दोष साबित नही होता तब तक उसे निर्दोष माना जाता है।
जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर जस्टिस दीपक सिब्बल जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस मीनाक्षी आई. मेहता की पांच जजों की पीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का सिद्धांत भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के दायरे में आता है।
इसके अनुसार कोई कैदी के लिए यह सही नही होगा की उसे सिर्फ इस लिए पैरोल न दिया जाए की इसके पास मोबाइल है। ऐसा करने से निष्पक्ष सुनवाई का उलंघन होगा.
- भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिले JCCJ प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन में हुए शामिल
- सिंगरौली में युवती से गैंगरेप: किडनैप कर जंगल ले जाकर की दरिंदगी, 3 आरोपियों को जेल
- यूपी बनेगा AI और रोबोटिक्स का हब: नोएडा में बनेगा देश का सबसे बड़ा एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेंटर
- Mahadev Betting App Case: रायपुर ED की टीम ने TV होस्ट Shefali Bagga से की पूछताछ, ऐप को प्रमोट करने का है आरोप
- MP TOP NEWS TODAY: 16 जुलाई को क्या कुछ रहा खास? एक क्लिक में पढ़ें आज की सभी बड़ी खबरें

