भारत-नेपाल सीमा विवाद पर दिए गए बयान के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने ही देश में घिरते नजर आ रहे हैं। उनके हालिया बयान ने नेपाल की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ छात्र संगठनों ने भी शाह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

विरोध की लहर पर सवार होकर सत्ता तक पहुंचे बालेन शाह अब अपने ही देश में तीखी आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। उनके बयान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम जनता के बीच भी बहस छेड़ दी है।

क्या है पूरा विवाद?

रविवार को संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने दावा किया कि नेपाल की सीमा से लगे कई क्षेत्रों में भारत द्वारा अतिक्रमण किया गया है। उनके इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया। शाह ने सीमा विवाद के समाधान के लिए इतिहासकारों, सर्वेयरों और विशेषज्ञों की मदद लेने की वकालत की। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान किए गए कूटनीतिक दस्तावेजों और औपनिवेशिक काल के नक्शों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर एकतरफा आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आपसी समझ और संवाद के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।

कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा फिर चर्चा में

इस पूरे विवाद के केंद्र में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा जैसे संवेदनशील क्षेत्र हैं, जिन पर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। भारत लगातार इन क्षेत्रों को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है और इस संबंध में अपना रुख कई बार स्पष्ट कर चुका है।

सीमा विवाद पर ब्रिटेन ने भी झाड़ा पल्ला

गौरतलब है कि, भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की बालेन शाह की कोशिशों को ब्रिटेन से भी बड़ा झटका लगा है। नेपाल के पीएम बालेन शाह की ओर से ब्रिटेन से हस्तक्षेप की अपील किए जाने के बावजूद लंदन इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है। लंदन ने साफ कर दिया है कि भारत-नेपाल सीमा विवाद पूरी तरह द्विपक्षीय मामला है और वह इसमें किसी भी तरह का दखल नहीं देगा।

भारत का स्पष्ट संदेश

नेपाल में उठे इस विवाद के बीच भारत सरकार ने मंगलवार को अपना रुख दोहराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सभी मुद्दे पूरी तरह द्विपक्षीय हैं और इनके समाधान के लिए किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा संबंधी मामलों को दोनों देशों के स्थापित तंत्र और आपसी संवाद के माध्यम से सुलझाया जा रहा है तथा भविष्य में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

नेपाल में बढ़ता राजनीतिक दबाव

बालेन शाह के बयान के बाद नेपाल की विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने भी उनके खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी दी है। ऐसे में प्रधानमंत्री शाह के लिए यह विवाद राजनीतिक रूप से बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।

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