Mamata Banerjee Party TMC: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन ने वहां की सियासी फिजा को बदलकर रख दिया है। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को इस्तीफे के जरिए लगातार झटके भी लग रहे हैं। वहीं उनके भ्रष्ट और आपराधिक छवि वाले नेताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। सिग्नेचर फर्जीवाड़े (signature forgery) ने तो टीएमसी को दो धड़ों में बांट दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, तीन विधायकों ने कहा है कि रजिस्टर में मौजूद सिग्नेचर उनके नहीं हैं। वहीं अब CID ने TMC सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजकर बैठक का रजिस्टर पेश करने को कहा है। इन सबके बीच टीएमसी के दो टुकड़ों में बंटने की भी चर्चा शुरू हो गई है। बंगाल के सियासी गलियारे में चर्चा भी जोर पकड़ती जा रही है कि एक ऐसी नई तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई जाए जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी न हों।
बता दें कि टीएमसी में सिग्नेचर फर्जीवाड़ा विवाद को लेकर पार्टी के खिलाफ आवाज उठाने 2 विधायकों (ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपान साहा) को पार्टी से निकाल दिया गया है। इन दोनों विधायकों को निकाले जाेने के बाद बंगाल में चर्चा तेज हो गई है कि कहीं ‘महाराष्ट्र मॉडल’ दोहराए जाने की तैयारी चल रही है? जैसा साल 2022 में महाराष्ट्र की शिवसेना में हुआ था।

दोनों विधायकों को निकाले जाने के बाद फूट की संभावना को और भी बल मिल रहा है। अटकलें ऐसी भी लगाई जा रही हैं कि करीब 50 विधायक तृणमूल पार्टी से अलग हो सकते हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ सांसद भी हैं जो बागी तेवर दिखाने की फिराक में हैं और इस बारे में उनकी बातचीत चल रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के घर पर बुलाई गई बैठक से बड़ी संख्या में विधायकों ने दूरी बनाए रखी तो कुछ विधायक खुलकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बोल रहे हैं।
बैठक में 80 में से 60 विधायक अनुपस्थित
बता दें कि पिछले हफ्ते शनिवार को कालीघाट में हुई बैठक से तृणमूल के कुल 80 विधायकों में से कम से कम 60 विधायक अनुपस्थित रहे थे। पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर कथित हमलों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को अपने कालीघाट स्थित आवास पर पार्टी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। हालांकि, इस बैठक में अपेक्षित संख्या में विधायक नहीं पहुंचे, जिसके चलते इसे स्थगित करना पड़ा था। TMC के कुल 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही बैठक में शामिल हुए। इनमें पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद थे, लेकिन बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक ये सभी विधायक ममता बनर्जी और टीएमसी से दूरी बनाते हुए दिख रहे हैं। लिहाजा अंदेशा जताया जा रहा है कि जल्द दी टीएमसी के दो टुकड़े हो सकते हैं।
ममता का आरोप- बीजेपी डरा रही
इधर टीएमसी अंदर मचे घमासान को लेकर अपनी ही पार्टी में मौजूद एक गुट के साथ-साथ बीजेपी को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी डरा-धमकाकर और पैसों का लालच देकर तृणमूल के विधायकों और सांसदों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। वहीं पार्टी के कुछ नेता गद्दारों जैसा बर्ताव कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने दावा करते हुए कहा कि चार विधायक मेरे पास शिकायतें लेकर आए थे कि पुलिस उन्हें डरा-धमका रही थी। उनसे यह भी कहा गया कि अगर वे बैठक में शामिल हुए, तो उन्हें ‘आर्म्स एक्ट’ के तहत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह किस तरह का लोकतंत्र है? इस राज्य में ज़ुल्म की सारी हदें पार हो चुकी हैं।
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