पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर की चर्चा तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित नेता Riju Dutta ने दावा किया है कि पार्टी के 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक एक अलग गुट बनाकर खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” घोषित करने की तैयारी में हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, बागी विधायक विधानसभा स्पीकर के सामने तीन प्रमुख मांगें रखने की तैयारी कर रहे हैं, हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता दी जाए, न कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को। दो-तिहाई बहुमत होने के आधार पर पार्टी का चुनाव चिह्न नए गुट को सौंपा जाए।

https://lalluram.com/cm-rekha-gupta-takes-major-action-over-40-cpa-doctors-and-officials-transferred-over-irregularities-in-drug-procurement

हालांकि, नए गुट को आधिकारिक मान्यता पाने के लिए 80 में से कम से कम 54 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। इससे कम संख्या होने पर स्पीकर द्वारा अलग गुट को मान्यता मिलना मुश्किल माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह दावा करने वाले रिजू दत्ता स्वयं विधायक नहीं हैं।

इस बीच, हाल ही में पार्टी से निकाले गए विधायक Sandipan Saha और Ritabrata Banerjee ने कोलकाता स्थित MLA हॉस्टल में कई TMC विधायकों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायक भी शामिल हुए, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

तीन बयानों से गरमाई सियासत

BJP का रुख: “TMC नेताओं के लिए दरवाजे बंद”

Samik Bhattacharya ने स्पष्ट किया कि BJP फिलहाल TMC नेताओं को पार्टी में शामिल करने के मूड में नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी ने अपनी ताकत जमीनी स्तर पर बनाई है और “दागी नेताओं” के लिए BJP में कोई जगह नहीं है।

TMC का पलटवार: “अधिकांश विधायक ममता के साथ”

TMC के वरिष्ठ नेता Shobhandeb Chattopadhyay ने बगावत की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के अधिकांश विधायक Mamata Banerjee के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं और संगठन पर पुराने नेतृत्व का नियंत्रण बरकरार रहेगा।

कांग्रेस का तंज: “TMC के अस्तित्व पर सवाल”

कांग्रेस नेता Udit Raj ने कहा कि TMC आज उसी स्थिति का सामना कर रही है जिसकी नींव उसने खुद रखी थी। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और भविष्य में उसका राजनीतिक अस्तित्व भी चुनौती में पड़ सकता है।

क्या TMC में सचमुच टूट होगी?

फिलहाल बगावत के दावों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वास्तव में कितने विधायक नए गुट के साथ खड़े होते हैं। यदि बागी खेमे को 54 या उससे अधिक विधायकों का समर्थन मिलता है, तो बंगाल की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है। वहीं, यदि संख्या कम रहती है, तो यह पूरा घटनाक्रम केवल दबाव की राजनीति बनकर रह जाएगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m