पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद जारी घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर सड़क पर उतर आई हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों, खासकर अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में ममता मंगलवार को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित Y-चैनल धरना स्थल पहुंचीं। खास बात यह रही कि कोलकाता पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद उन्होंने धरना शुरू कर दिया।
धरना स्थल पर ममता के साथ अभिषेक बनर्जी, कई वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। मौके पर भारी भीड़ जुटने से इलाके में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया।
ममता का सीधा संदेश: ‘गिरफ्तार करना है तो कर लो’
धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने पुलिस और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन TMC नेताओं को डराने और पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
ममता ने कहा, “मैं हमेशा हर विचारधारा के लोगों के साथ खड़ी रही हूं। लेकिन आज लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार भी छीना जा रहा है। अगर बीजेपी चाहती है तो मुझे गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन मैं पीछे हटने वाली नहीं हूं।” इसके साथ ही उन्होंने संघर्ष का आह्वान करते हुए कहा, “हम लड़ेंगे या मरेंगे, लेकिन झुकेंगे नहीं।”
अभिषेक पर हमले का मुद्दा गरमाया
अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में उनसे मदद मांगी थी, वही लोग मुश्किल समय में चुप रहे। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी नेताओं ने कई मौकों पर उनसे सहायता मांगी थी और उन्होंने हमेशा सहयोग किया, लेकिन जब उनके भतीजे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ तो किसी ने समर्थन नहीं दिया।
‘कोलकाता में नहीं तो दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन’
ममता ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि उन्हें बंगाल में विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई तो वह अपनी लड़ाई दिल्ली तक ले जाएंगी। उन्होंने कहा, “अगर मुझे यहां लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने नहीं दिया जाएगा तो मैं दिल्ली जाऊंगी। INDIA गठबंधन की बैठक भी है और वहां भी मैं यह मुद्दा उठाऊंगी।”
चुनावी हार के बाद पहली बार सड़क पर उतरीं ममता
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में TMC को मिली करारी हार के बाद यह पहला मौका है जब ममता बनर्जी बड़े सार्वजनिक आंदोलन का नेतृत्व करती नजर आई हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और हाल ही में दो विधायकों के निष्कासन के बाद यह धरना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
ममता ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में गड़बड़ी हुई और चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने दावा किया कि मतगणना के दौरान उनके साथ भी अन्याय हुआ।
बंगाल की सियासत में बढ़ी गर्मी
एक ओर TMC नेतृत्व इसे लोकतंत्र और पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी हार के बाद सहानुभूति जुटाने की कोशिश करार दे रहा है। पुलिस की अनुमति के बिना शुरू हुए इस धरने ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यह आंदोलन आगे क्या रूप लेता है और बंगाल की सियासत को किस दिशा में ले जाता है।
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