प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर। जिले के आदिवासी बाहुल्य मानपुर इलाके में केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम नौनिहालों की जिंदगी संवार रहा है। यह कार्यक्रम चिकित्सा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे। मानपुर स्वास्थ्य अमले में शुमार “चिरायु” की टीम बीहड़ जंगलों के बीच बसाहट वाले इस इलाके में हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों का सफल ऑपरेशन कराकर उन्हें जन्मजात हृदय रोग से मुक्ति दिलाने का न केवल काम कर रही है बल्कि साल दर साल बड़ी संख्या में हृदय रोग से ग्रसित बच्चों का राजधानी रायपुर में सफल ऑपरेशन सुनिश्चित कराकर रोग और पीड़ा से छीन चुकी उनकी खुशियां उन्हें वापस लौटा भी रही है। चिरायु टीम ने दो साल में 19 बच्चों का सफल ऑपरेशन कराकर नई जिंदगी दिलाई है।
2014 से अब तक 40 बच्चों के दिल का सफल ऑपरेशन
मानपुर विकासखंड में बीते एक साल के भीतर सत्र 2024-25 और 2025-26 यानी दो वर्ष के भीतर ही गंभीर हृदय रोग से ग्रसित कुल 19 बच्चों को राजधानी रायपुर के प्रतिष्ठित अस्पताल MMI नारायणा भेजकर उनका सफल ऑपरेशन कराकर हृदय रोग से मुक्त खुशहाल जिंदगी दी जा चुकी है। सरकार द्वारा लाए गए इस योजना के प्रारंभ वर्ष से अब तक की बात करें तो जिले के इस अकेले विकासखंड मानपुर में 2014 से अब तक कुल 40 बच्चों के हृदय रोग का सफल ऑपरेशन “चिरायु” की टीम सुनिश्चित करवा चुकी है।


किसी बच्चे के दिल में छेद था तो कोई दिल में उपजे गंभीर रोग से पीड़ित था। अपने मासूम बच्चे को यूं रोग से जूझते देख जहां किसी अनहोनी की आशंका में उनके परिजनो की आशाएं दम तोड़ने लगी थी, वहीं दिल के इस दर्द ने इन मासूमों का जीवन भी मुहाल कर रखा था। हृदय रोग के ऑपरेशन में लगने वाली लगभग 3 लाख या उससे अधिक की अनुमानित लागत भी इन बच्चों के परिजनों की चिंता और असमर्थता का बड़ा कारण बना हुआ था, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद और “चिरायु” के प्रयास से निःशुल्क ऑपरेशन व चिकित्सा लाभ हासिल कर ये बच्चे और उनका परिवार अब चिंता मुक्त खुशहाल जिंदगी जी रहा है।
आदिवासी बाहुल्य दूरस्थ गांवों के बच्चे हुए लाभान्वित
दरअसल मानपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैनात “चिरायु” टीम स्थानीय BMO डॉ. गिरीश खोबरागड़े के निर्देशन और “चिरायु” टीम प्रभारी डॉ. सुनील गायकवाड़ महिला चिकित्सक डॉ. पायल साहू के नेतृत्व वाला फार्माशिस्ट विद्या देहारी, जयराम वर्मा, लैब टेक्नीशियन लोकेश्वरी सोरी व ए.एन.एम. भाग्यलक्ष्मी से युक्त “चिरायु” अमला लगातार गांव-गांव जाकर जरूरतमंद आमजनों विशेषकर स्कूलों, आंगनबाड़ियों के बच्चों को चिकित्सकीय लाभ दे रहे हैं। इसी कड़ी में समय-समय पर “चिरायु” टीम के सामने गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के केस भी आए।
“चिरायु” टीम ने पूरी संवेदनशीलता से बच्चों को हृदय रोग से मुक्ति दिलाने की जिम्मेदारी संभाली और एक के बाद एक बच्चों को रायपुर स्थित MMI नारायणा अस्पताल भेजकर उनके हृदय रोग का निःशुल्क ऑपरेशन सुनिश्चित कराया। नतीजतन आज इस दूरस्थ इलाके के तीन दर्जन से अधिक हृदय रोग से ग्रसित बच्चों को इस गंभीर रोग से छुटकारा मिल चुका है। वहीं इलाके के करीब दर्जन भर हृदय रोग संबंधित बच्चे “चिरायु” टीम के आब्जर्वेशन में हैं, जिन्हें बेहतर चिकित्सा लाभ देने की जुगत में टीम जुटी हुई है।
बीमारी छिन रहा था बचपन, अब मिला तकलीफों से छुटकारा
ये वो हृदय रोग ग्रसित बच्चे हैं, जो दिल में छेद या गंभीर हृदय रोग से ग्रसित होने के चलते न तो मनभर खेल कूद पाते थे, न ही अपने बचपन पूरी तरह जी पाते थे। आए दिन कोई न कोई तकलीफ और थकान रहती थी, लेकिन जब चिरायु की टीम ने इनका इलाज सुनिश्चित कराया तो ये बच्चे अब हृदय रोग से मुक्त होकर अपना बचपन बिना किसी तकलीफ के जीने लगे हैं।
लाभान्वित बच्चों के परिजनों ने चिरायु की टीम समेत प्रारंभिक मार्गदर्शक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व विशेष तौर पर केंद्र सरकार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने के लिए धन्यवाद भी ज्ञापित किया है। बता दें कि चिरायु की टीम ने इस मानपुर क्षेत्र में नक्सलवाद का दंश और पिछड़ेपन के आगोश में ग्राम दोरबा, वाको, कोतरी समेत अन्य गांव के रहने वाले परिवार के इन मासूम नौनिहालों को उनका खोया बचपन लौटा दिया है, इस बात में कोई दोराय नहीं है।
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