भारतीय नागरिकों के लिए वीजा फ्री एंट्री देने वाले देशों की संख्या बढ़ी है. विदेश मंत्रालय के अनुसार पहले 2019 में 16 थी जो अब बढ़कर यह सख्यां 27 हो गई है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि साल 2025 में हमने जहां 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान कीं है उनमें सिर्फ अकेले पासपोर्टों की संख्या 1.39 करोड़ रही है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने जरूरी अपडेट जारी करते हुए साफ किया कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं, सिर्फ ट्रैवल डॉक्यूमेंट है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि अवैध प्रवासन से भारतीय पासपोर्ट की साख गिरती है. इस पर रोक लगनी चाहिए. मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता के सबूत के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट बताया कि पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा के दौरान सिर्फ राष्ट्रीयता दिखाता है, लेकिन इसे नागरिकता के दस्तावेज़ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा का दस्तावेज है.
विदेश मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार 47 देश भारतीयों को वीजा ऑन अराइवल की सुविधा देते हैं और 66 देश भारतीयों के लिए ई-वीजा उपलब्ध कराते हैं. एकेडमिक्स, छात्रों, अप्रेंटिस, आम पर्यटकों और कारोबारियों की आसान आवाजाही के लिए यूरोप के साथ मोबिलिटी एग्रीमेंट (आवाजाही से जुड़े समझौते) किए गए हैं.

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार का फोकस अब पासपोर्ट प्रक्रियाओं को बेहद आसान और पारदर्शी बनाने पर है. भारत एक तरफ लोगों के लिए विदेश जाने के कानूनी और सुरक्षित रास्ते बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अवैध प्रवासन को हतोत्साहित करने पर भी जोर दे रहा है.
अधिकारी ने कहा कि कई लोग एजेंटों और गलत तरीकों के जरिए अमेरिका, यूरोप या अन्य देशों में पहुंचने की कोशिश करते हैं, सुनहरे भविष्य की गलत धारणा को जमीनी स्तर पर तोड़ना होगा.
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