शिवसेना (UBT) से छह सांसदों के हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए. उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी है. सांसदों ने पार्टी बदलने का कारण फंड का नहीं मिलना बताया. लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है. इन सांसदों ने आवंटित MPLADS फंड का मात्र 1.07% से 26.84% ही इस्तेमाल किया, जबकि उनके पास लगभग 100 करोड़ रुपये उपलब्ध थे.

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के आधिकारिक आंकड़ों ने पाला बदलने के उनके मुख्य तर्क को झुठला दिया है. सांसदों ने शिवसेना (UBT) गुट छोड़ने का मुख्य कारण ‘फंड की अनुपलब्धता’ बताया और इसके चलते अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में विकास कार्य कराने में असमर्थता बताया था.

उद्धव के बागी सांसदों ने विकास कार्यों के लिए फंड की कमी का आरोप लगाकर शिंदे गुट ज्वाइन किया, लेकिन सच्चाई चौंकाने वाली है. इन सांसदों ने आवंटित MPLADS फंड का मात्र 1.07% से 26.84% ही इस्तेमाल किया, जबकि उनके पास लगभग 100 करोड़ रुपये उपलब्ध थे.

इन बागी सांसदों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि उनके क्षेत्र में विकास के काम करने के लिए पैसे नहीं हैं या फिर उसकी कमी है. पर सच्चाई कुछ और उजागर हुआ. केंद्र सरकार की MPLADS वेबसाइट के तीन साल के आंकड़ों से इस बात का पता चला है कि इन सांसदों ने अपने आवंटित पैसे का सिर्फ 1.07 से 26.84 फीसदी तक ही खर्च किया.

एमपीएलएडीएस योजना के तहत हर सांसद को हर साल 5 करोड़ रुपये मिलते हैं और अगर सांसद निधि का जो पैसा खर्च नहीं होता है, वह अगले साल के लिए अपने आप जुड़ जाता है.

जानकारी के अनुसार इन छह बागी सांसदों के पास कुल करीब 100 करोड़ रुपये थे. शिवसेना यूबीटी के इन छह बागी सांसदों ने पिछले दो वित्तीय वर्षों और इस साल की पहली तिमाही में औसतन सिर्फ 13.60 करोड़ रुपये ही खर्च किए.

शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आकड़ें साफ बता रहे है कि सांसदों ने MPLADS फंड को सही तरीके से खर्च करने में पूरी तरह असफल रहे. उन्होंने आगे कहा है कि पार्टी छोड़कर जाने के बाद अभी वे किस फंड के प्रति वफादार हो गए है, ये सब तो वहीं लोग बता सकते है.

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