पटना सिटी के वार्ड संख्या 61 के अंतर्गत आने वाले रानीपुर इलाके में गुरुवार की शाम खेलते-खेलते एक 12 वर्षीय मासूम खुले नाले में जा गिरा, जिससे उसकी जान चली गई। इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय नागरिकों के बीच नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि निगम की उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही आज एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया है।
खेल-खेल में हुआ हादसा और नाले में फंसा मासूम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रानीपुर निवासी मुकेश कुमार का 12 वर्षीय बेटा अपने मोहल्ले में शाम के वक्त खेल रहा था। इसी दौरान वह अचानक पैर फिसलने या अनियंत्रित होने के कारण पास ही बने एक खुले नाले में जा गिरा। दुर्भाग्यवश, उस नाले में भारी मात्रा में कचरा, प्लास्टिक और गाद जमा थी। नाले के भीतर मौजूद गंदगी और कचरे के जाल में बच्चा बुरी तरह फंस गया, जिससे वह चाहकर भी बाहर नहीं निकल सका और दम घुटने से उसकी सांसें थम गईं।
परिजनों और स्थानीय लोगों का संघर्ष और अस्पताल का निराशाजनक परिणाम
घटना की भनक लगते ही आसपास के लोग तुरंत मौके पर दौड़ पड़े। स्थानीय निवासियों ने भारी मशक्कत के बाद बच्चे को किसी तरह नाले से बाहर निकाला। बिना एक पल गंवाए उसे आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्चे का परीक्षण करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अपने जिगर के टुकड़े को इस तरह अचानक खो देने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और शुभचिंतकों ने भारी दुखों के साथ गुरुवार की शाम ही बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद आक्रोशित स्थानीय लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर एकत्र हो गए और पटना नगर निगम के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि वार्ड संख्या 61 में लंबे समय से खुले नालों और बेहद खराब सफाई व्यवस्था की शिकायतें की जा रही थीं। स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई थी कि इन खुले नालों को ढंका जाए और नियमित रूप से उनकी सफाई की जाए, लेकिन निगम प्रशासन ने हर बार गहरी नींद सोते हुए शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया।
मोहल्लेवासियों का कहना है कि अगर समय रहते नगर निगम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए नाले को ढंक दिया होता या उसकी सफाई कराई होती, तो आज इस मासूम बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर शहरी इलाकों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख दी है।
पुलिस और प्रशासन का पक्ष
घटना की सूचना मिलते ही मेहंदीगंज थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मेहंदीगंज थाना प्रभारी पूजा कुमारी ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को अब तक मृतक के परिजनों की ओर से कोई भी लिखित शिकायत या आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। फिलहाल पुलिस ने मौके से मिले तथ्यों और बयानों के आधार पर सनहा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही परिजनों की तरफ से लिखित आवेदन प्राप्त होगा, उसके आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, इस गंभीर हादसे के बाद से पटना नगर निगम की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। निगम की इस चुप्पी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से स्थानीय लोगों का गुस्सा और अधिक भड़क गया है। जनता अब पूरे वार्ड में फैले सभी खुले नालों को तत्काल प्रभाव से ढंकने और जर्जर सड़कों की मरम्मत कराने की जोरदार मांग कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी अन्य दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।


