पटना। शहर के एम्स गोलंबर के पास 12 फरवरी को 12वीं कक्षा की एक छात्रा की 8वीं मंजिल से गिरकर हुई मौत की गुत्थी पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। लगभग दो महीने की गहन जांच के बाद पटना पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया है। सिटी एसपी (पश्चिम) भानु प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि तकनीकी साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हत्या और यौन शोषण के आरोप निराधार पाए गए हैं।

​SIT की जांच और पॉलिग्राफी टेस्ट

​घटना के बाद परिजनों ने कोचिंग में काम करने वाले मजदूरों पर हत्या और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया। जांच के दौरान संदिग्ध मजदूरों को हिरासत में लेकर दिल्ली से आई सीएफएसएल (CFSL) की टीम द्वारा पॉलिग्राफी टेस्ट कराया गया, जिसमें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले। इसके अलावा घटनास्थल पर डॉग स्क्वायड और एफएसएल की टीम ने गहन छानबीन की थी।

​क्या कहती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट?

​AIIMS पटना के मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, छात्रा की मौत ‘पॉलीट्रॉमा’ (शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट) के कारण हुई। मौत के मुख्य कारणों में अत्यधिक रक्तस्राव, सांस रुकना और रीढ़ की हड्डी में लगी चोट शामिल है। शरीर पर मिले घावों (नंबर 9 और 13) को लेकर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि ये कंधे और जांघ की हड्डी टूटने के कारण बने थे, जबकि कमर पर रगड़ के निशान ऊंचाई से गिरते समय किसी छज्जे से टकराने के कारण आए थे।

​CCTV फुटेज और प्रत्यक्ष प्रमाण

​कोचिंग के सीसीटीवी फुटेज में छात्रा को सीढ़ियों से ऊपर भागते हुए देखा गया था। उसके पीछे दो लड़के भी जाते दिखे, जो छात्रा के गिरने के बाद वापस नीचे भागते नजर आए। पुलिस ने इन सभी पहलुओं की जांच की और पाया कि छत से धक्का दिए जाने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। सीन रिक्रिएशन और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने मजदूरों पर लगे आरोपों को गलत पाया है।

​अगला कदम: आत्महत्या के कारणों की तलाश

​भले ही पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया है, लेकिन सवाल अब भी बरकरार है कि छात्रा ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया? पुलिस अब उन कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है जिसने 17 वर्षीय छात्रा को मानसिक रूप से इस हद तक मजबूर किया।