कुंदन कुमार, ​पटना। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य में बाढ़ की स्थिति और उससे निपटने के लिए सरकार की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानसून के इस सीजन में बाढ़ की स्थिति पिछले सालों की तुलना में पूरी तरह अलग और चुनौतीपूर्ण रही है। इस बार नेपाल में पारंपरिक मानसूनी बारिश के साथ-साथ ग्लेशियर फटने जैसी अप्रत्याशित प्राकृतिक घटनाओं के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।

​मंत्री ने बताया कि इस बार मौसम चक्र में आए बदलाव के कारण नेपाल की नदियों के साथ-साथ सितंबर के अंत में आने वाली गंगा में भी असामान्य रूप से बहुत पहले ही बाढ़ आ गई। पटना के गांधी घाट सहित गंगा नदी के कई हिस्सों में जलस्तर ने पिछले सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इसके अलावा, पुनपुन और दरधा जैसी नदियों में भी इस साल रिकॉर्ड पानी आया है, जिसके कारण निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी फैल गया। पुराने तटबंधों पर भी पानी का दबाव बढ़ा और कुछ जगहों पर पानी तटबंधों से आगे तक पहुंच गया, लेकिन प्रशासनिक मुस्तैदी से स्थिति पर काफी हद तक नियंत्रण रखा गया।

​सरकार के राहत और बचाव कार्यों का जिक्र करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री इस पूरी स्थिति पर खुद लगातार नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राज्य के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पूरा हक है, इसलिए उन्हें हरसंभव अधिकतम सहायता पहुंचाई जाए। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावों और स्टीमर की व्यवस्था की गई है। भागलपुर में गंगा नदी के कटाव और बदलती धारा के खतरनाक मोड़ पर अधिकारियों ने कैंप कर समय रहते स्थिति को संभाल लिया, जिससे रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान टल गया।

​फिलहाल पुनपुन और दरधा नदियों में जलस्तर का खतरा अभी भी बना हुआ है क्योंकि इन छोटी नदियों का पानी अंततः गंगा में ही गिरता है। गंगा का जलस्तर धीमी गति से घट रहा है और इसमें 18 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों और प्रशासन को उम्मीद है कि गंगा का पानी घटने के साथ ही पुनपुन और अन्य सहायक नदियों का जलस्तर भी तेजी से नीचे उतरेगा। सरकार पूर्व के मानकों और एसओपी (SOP) के तहत बाढ़ प्रबंधन के कार्य कर रही है और उम्मीद है कि कल से स्थिति में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।