कुंदन कुमार/ पटना। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के वीर चंद पटेल पथ स्थित मिलर हाई स्कूल का दौरा किया और विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की औपचारिक शुरुआत की।
अभिभावकों में बढ़ेगा सरकारी स्कूलों के प्रति भरोसा
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन मॉडल स्कूलों का उद्देश्य सरकारी शिक्षा प्रणाली को इतना उन्नत बनाना है कि अभिभावक अपने बच्चों के नामांकन के लिए स्वयं पहल करें। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में शिक्षा का स्तर और आधारभूत संरचना इतनी बेहतर होगी कि निजी स्कूलों को टक्कर मिल सकेगी। इस अवसर पर उनके साथ बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) नवल किशोर यादव भी उपस्थित रहे।




क्या होंगी मॉडल स्कूल की विशेषताएं?
सरकार की योजना के तहत चयनित विद्यालयों में केवल भवन का कायाकल्प ही नहीं होगा बल्कि शिक्षण पद्धति को भी आधुनिक बनाया जाएगा। मिलर हाई स्कूल को अब स्मार्ट क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और खेल-कूद की विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य न केवल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, बल्कि सरकारी स्कूलों की छवि को एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में स्थापित करना है। सरकार के इस कदम से राज्य के अन्य विद्यालयों के लिए भी एक मानक तैयार होगा जिससे आने वाले समय में पूरी शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

