जन सुराज के नेता और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने पटना वासियों को निकाय चुनाव से पहले एक नया फॉर्मूला दिया है। उनका कहना है कि शहर की बुनियादी समस्याओं से पार पाने के लिए जनता को जाति, धर्म और दल से ऊपर उठकर ईमानदार जनप्रतिनिधियों का चुनाव करना होगा।
वार्ड पार्षद और मेयर चुनाव का महत्व
बुनियादी समस्याओं का समाधान: नाली, गली, कूड़ा-कचरा और पार्कों जैसी स्थानीय समस्याओं का राष्ट्रीय मुद्दों या किसी बड़े चेहरे से कोई लेना-देना नहीं है।
- जिम्मेदारी तय करना: इन समस्याओं के समाधान के लिए यह देखना जरूरी है कि आपका वार्ड पार्षद और पटना का मेयर ईमानदार है या नहीं।
- लोकतंत्र की ताकत: विधानसभा चुनाव के बाद अब अगले वर्ष होने वाले नगर निकाय चुनाव में जनता के पास अपनी पसंद का सही प्रतिनिधि चुनने का सीधा अवसर है।
नेताओं का कचरा साफ करने की जरूरत
प्रशांत किशोर ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गलियों से कचरा साफ करवाना है, तो सबसे पहले राजनीति और सदन से गलत चेहरों का कचरा साफ करना होगा। यदि आप केवल किसी एक विशेष चेहरे या पार्टी को देखकर वोट देंगे, तो स्थानीय स्तर पर आपकी परेशानियां जस की तस बनी रहेंगी।
- योग्यता को दें प्राथमिकता: वोट देते समय यह न देखें कि उम्मीदवार किस जाति या धर्म का है, बल्कि यह देखें कि वह कितना सक्षम और ईमानदार है।
- विकासोन्मुखी सोच: एक अच्छा प्रतिनिधि चुने जाने पर ही वह पूरे क्षेत्र के विकास और जनता की भलाई के प्रति समर्पित होकर कार्य करेगा।
निकाय चुनाव से पहले जन जागरण अभियान
आगामी निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रशांत किशोर ने जनता को जागरूक करना शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटना शहर को पूरी तरह बदलते हुए देखना है, तो जनता को अपनी सोच में बदलाव लाकर केवल और केवल सबसे अच्छे और योग्य व्यक्ति को ही अपना वोट देना चाहिए।

