पटना। जिले में नदी किनारे और दियारा क्षेत्र में स्थित 16 सरकारी स्कूलों के बच्चों को अब तैराकी का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को बाढ़ और अन्य जल-जनित प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अपनी और दूसरों की जान बचाने में सक्षम बनाना है। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित ‘जन जागरूकता पखवाड़ा’ के तहत यह पहल शुरू की गई है।
विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत पेशेवर तरीके से आयोजित किया जाएगा। इसमें राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के जवान, प्रशिक्षित आपदा मित्र और मास्टर ट्रेनर बच्चों को तैराकी के गुर सिखाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि बच्चे कुशलतापूर्वक जल सुरक्षा सीख सकें।
बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने की पहल
बीते वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो डूबने की घटनाओं में सबसे अधिक संख्या 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की रही है। इसी चिंताजनक स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूली स्तर पर ही बच्चों को तैराकी में दक्ष बनाने का निर्णय लिया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आपदा के समय आत्मरक्षा के लिए तैयार करना है।
जागरूकता के लिए विविध प्रतियोगिताएं
केवल तैराकी ही नहीं बल्कि नदी किनारे स्थित स्कूलों में छात्रों के बीच डूबने से बचाव और जोखिम न्यूनीकरण जैसे विषयों पर क्विज, पेंटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को स्कूल प्रशासन की ओर से प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
प्रशासनिक निगरानी और माक ड्रिल
इस पूरे अभियान के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) कृतिका वर्मा को नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। एसडीआरएफ और आपदा मित्र स्कूलों में नियमित रूप से माक ड्रिल का आयोजन करेंगे ताकि बच्चे व्यावहारिक रूप से आपदा प्रबंधन को समझ सकें। नोडल पदाधिकारी को सभी कार्यक्रमों की जीपीएस-टैग्ड फोटोग्राफी और विस्तृत रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रमुख स्कूल
इस कार्यक्रम के तहत बाढ़, फतुहा, पटना सदर, दानापुर और दुल्हिन बाजार प्रखंडों के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का चयन किया गया है, जो विशेष रूप से नदी या तालाब के निकट स्थित हैं।

