कुंदन कुमार, पटना। एक तरफ जहां छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक पीढ़ी यानी जेन अल्फा के बच्चों को उनके भविष्य के लिए संवारने की एक अनूठी शुरुआत की गई है। शहर के एक निजी विद्यालय में छात्र संसद का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को देश के संविधान, उनकी जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक मूल्यों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

​जदयू विधायक सुभानंद मुकेश की खास मौजूदगी

​इस विशेष कार्यक्रम में जदयू (JDU) विधायक सुभानंद मुकेश मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए अनुशासन के महत्व और अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाने के तौर-तरीके सिखाए।

  • ​विधायक का बयान: सुभानंद मुकेश ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह एक बेहद सराहनीय पहल है। अगर हम अपनी नई पीढ़ी (जेन अल्फा और जेन जी) को शुरुआती दौर से ही हमारे संविधान, उनके मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बताएंगे, तो आने वाली पीढ़ी निश्चित रूप से मजबूत और जिम्मेदार नागरिक बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों को उग्र होने के बजाय संवाद के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए।

​विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों का दृष्टिकोण

​विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा देना है।

  • ​संसद की कार्यप्रणाली: शिक्षक ने बताया कि छात्र संसद के जरिए बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि देश की संसद में किस प्रकार कार्य होते हैं और कैसे पूरा देश हमारे संविधान के दायरे में रहकर संचालित होता है।
  • ​अनुशासन का संदेश: विद्यालय परिवार का मानना है कि छात्रों के जीवन में अनुशासन सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। बच्चों को यह भी सिखाया गया कि समस्याओं के समाधान के लिए कभी भी उग्र रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि अपनी बात को शालीनता से रखना चाहिए।

​छात्रों की प्रतिक्रिया

​कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं ने इस अनुभव को बेहद रोमांचक और ज्ञानवर्धक बताया।

  • ​सीखने का अवसर: छात्र-छात्राओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज उन्हें जो बातें और जानकारियां सिखाई गई हैं, वे उनके जीवन में बहुत काम आएंगी। वे इन सीखों को बेहद गौर से समझ रहे हैं और भविष्य में भी इनका पूरी निष्ठा के साथ अनुसरण करने का प्रयास करेंगे। यह पहल निश्चित ही बच्चों के मानसिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।