पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निगरानी विभाग की टीम ने मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्ट्रार सनाउल्लाह को 2.5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने जो खुलासे किए, उसने विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।
VC के लिए वसूली का दावा
निगरानी की गिरफ्त में आने के बाद असिस्टेंट रजिस्ट्रार सनाउल्लाह ने सीधे तौर पर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर (VC) आलमगीर पर उंगली उठाई है। सनाउल्लाह का दावा है कि रिश्वत की यह रकम समस्तीपुर के एक कॉलेज की KRC प्रक्रिया के लिए खुद कुलपति ने मांगी थी। उसने कहा, मैं तो केवल पैसे पहुंचाने का जरिया था। कुलपति और कॉलेज के बीच पुराने संबंध हैं और इस सौदे की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। हालांकि, उसने यह भी स्वीकार किया कि इस काम के बदले उसे भी कुछ प्रतिशत कमीशन मिलना था।
5 लाख की डिमांड और ट्रैप
यह पूरा मामला 13 मार्च को शुरू हुआ, जब शिकायतकर्ता रामानंद महतो ने निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, दो KRC रिपोर्ट के बदले कुल 5 लाख की मांग की गई थी। आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता 2.5 लाख की पहली किस्त देने पहुंचा था। जैसे ही सनाउल्लाह ने पैसे पकड़े, पहले से जाल बिछाकर बैठी डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद की टीम ने उसे दबोच लिया।
ठिकानों पर छापेमारी और बेहिसाब संपत्ति
गिरफ्तारी के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सनाउल्लाह के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी। पटना के अनीसाबाद (अलीनगर) स्थित ‘लेडी इमाम अपार्टमेंट’ में देर रात तक छापेमारी चली। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई अब आय से अधिक संपत्ति की दिशा में मुड़ गई है। निगरानी टीम को घर से बैंक पासबुक, जमीन के कागजात, नकद और गहने मिले हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से बड़ी संपत्ति अर्जित की गई है।
निगरानी टीम की कार्रवाई
इस सफल ऑपरेशन में डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के साथ धावा दल प्रभारी मणिकांत सिंह, एएसआई रवि शंकर, कुमार रितेश और सिपाही वसीम अहमद शामिल थे। टीम ने रिश्वत की राशि के अलावा दफ्तर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी जब्त किए हैं। वर्तमान में पुलिस सनाउल्लाह के अन्य संपर्कों और भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट के ‘बैकग्राउंड लिंक्स’ को खंगालने में जुटी है। इस कार्रवाई ने शिक्षा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
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