पटना। राजधानी की सड़कें आज एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनीं, जब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में हजारों महिलाओं ने हुंकार भरी। स्कूटी पर सवार, माथे पर केसरिया पगड़ी और हाथों में संकल्प की तख्तियां लिए महिलाओं का हुजूम जब सड़कों पर निकला, तो हर कोई ठिठक कर देखने लगा। इस विशाल स्कूटी रैली का नेतृत्व और भागीदारी पूर्व खेल मंत्री सह विधायक श्रेयसी सिंह ने की।
केसरिया पगड़ी और सशक्तिकरण का संदेश
महिला आरक्षण बिल को संसद में पेश किए जाने के बाद से देशभर में उत्साह का माहौल है। इसी कड़ी में पटना की महिलाओं ने इसे एक उत्सव के रूप में मनाया। रैली के दौरान महिलाएं न केवल स्कूटी चला रही थीं, बल्कि उनके नारों में राजनीतिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता की गूंज थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह बिल केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने वाला क्रांतिकारी कदम है।
उत्साह के बीच सुरक्षा से समझौता
जहां एक ओर यह रैली महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनी, वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी ने प्रशासन और आयोजकों पर सवाल खड़े कर दिए। रैली में शामिल अधिकांश महिलाएं बिना हेलमेट के स्कूटी चलाती नजर आईं। चौंकाने वाली बात यह रही कि पूर्व खेल मंत्री श्रेयसी सिंह भी बिना हेलमेट के स्कूटी पर पीछे बैठी दिखीं। जन जागरूकता के नाम पर निकाली गई इस रैली में सुरक्षा मानकों की इस कदर अनदेखी चर्चा का विषय बन गई है।
जागरूकता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में बिना हेलमेट के फर्राटा भरती स्कूटियों ने ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी पर भी सवालिया निशान लगा दिया। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या जागरूकता रैलियों को कानून से ऊपर रखा जाना चाहिए? जानकारों का मानना है कि जब नेतृत्वकर्ता खुद नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो समाज में गलत संदेश जाता है।
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