Punjab Desk, चंडीगढ़। पंजाब में आवासीय परियोजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को मिलने वाला 10% आरक्षण अब एक कानूनी लड़ाई का मुद्दा बन गया है। पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर आरक्षण को सख्ती से लागू करने की मांग की। याचिका पर 1 जुलाई को सुनवाई होगी।

पापरा (पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन) एक्ट-1995 के तहत राज्य में हर बिल्डर या कॉलोनाइजर के लिए यह अनिवार्य है कि वे आवासीय परियोजनाओं में 10% यूनिट्स आर्थिक कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित रखें। सांसद का आरोप है कि कई वर्षों से इस प्रावधान को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि निजी बिल्डर्स और कॉलोनाइजर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

सांसद ने दावा किया कि बिल्डरों और सरकारी तंत्र के बीच एक अघोषित गठबंधन काम कर रहा है, जिसके चलते सरकारी तंत्र इस कानून को लागू करने में विफल रहा है। पापरा एक्ट का उद्देश्य शहरी विकास में समाज के कमजोर तबकों को सम्मानजनक आवास दिलाना था, पर जमीनी हकीकत यह है कि इन परिवारों का अपना घर खरीदने का सपना आज भी अधूरा है। सांसद ने गुहार लगाई कि राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं कि भविष्य में आरक्षण का सख्ती से पालन करवाएं।

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