Technology Desk – PIB Warning Fake AI Videos : सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नाम से वायरल हो रहे कुछ वीडियो को लेकर केंद्र सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। PIB ने स्पष्ट किया है कि ये वीडियो असली नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए डीपफेक (Deepfake) वीडियो हैं। एजेंसी ने लोगों से ऐसे भ्रामक वीडियो पर भरोसा न करने और बिना पुष्टि किए उन्हें आगे साझा न करने की अपील की है।

PIB ने क्या कहा?

PIB की फैक्ट चेक यूनिट के मुताबिक, वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री की आवाज तथा चेहरे के हावभाव को डिजिटल तकनीक से इस तरह बदला गया है कि देखने वालों को वे असली लगें। जांच में पाया गया कि वीडियो में दिखाई गई बातें दोनों नेताओं ने कभी नहीं कही थीं। एजेंसी का कहना है कि इस तरह के वीडियो लोगों को भ्रमित करने और गलत जानकारी फैलाने के मकसद से तैयार किए गए हैं।

पुराने वीडियो में AI से किया गया बदलाव

जांच के दौरान सामने आया कि कुछ वायरल क्लिप पुराने असली वीडियो पर आधारित हैं। इनमें ऑडियो और विजुअल दोनों में AI की मदद से बदलाव किए गए, जिससे ऐसा लगे कि नेताओं ने विवादित बयान दिए हैं। PIB ने साफ किया कि इन वीडियो की सामग्री वास्तविक घटनाओं या आधिकारिक बयानों से मेल नहीं खाती।

क्या होता है Deepfake?

Deepfake ऐसी तकनीक है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और बोलने के अंदाज की हूबहू नकल करके नया वीडियो या ऑडियो तैयार कर देता है। पहली नजर में यह बिल्कुल असली लगता है, लेकिन वास्तव में इसे कंप्यूटर तकनीक से बनाया या बदला गया होता है।

कैसे तैयार किए जाते हैं ऐसे वीडियो?

Deepfake बनाने के लिए AI पहले किसी व्यक्ति की बड़ी संख्या में फोटो, वीडियो और ऑडियो का अध्ययन करता है। इसके बाद वह चेहरे की बनावट, आंखों की हरकत, बोलने का तरीका और आवाज की शैली सीख लेता है। फिर इन जानकारियों का इस्तेमाल करके ऐसा वीडियो तैयार किया जाता है, जिसमें व्यक्ति ऐसी बातें करता या करता हुआ दिखाई देता है, जो उसने वास्तव में कभी नहीं की होतीं।

हर Deepfake गलत नहीं, लेकिन दुरुपयोग बड़ा खतरा

इस तकनीक का उपयोग फिल्मों, डिजिटल कंटेंट, शिक्षा और विजुअल इफेक्ट्स जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में भी किया जाता है। लेकिन इसका गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। फर्जी बयान, राजनीतिक दुष्प्रचार, अफवाह फैलाना, किसी की छवि खराब करना और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में Deepfake का इस्तेमाल चिंता का विषय बनता जा रहा है।

Deepfake से कैसे बचें?

अगर किसी वीडियो में होंठों की हरकत और आवाज में तालमेल न दिखे, चेहरे के भाव असामान्य लगें, आंखों की झपक प्राकृतिक न लगे या वीडियो की गुणवत्ता अलग-अलग नजर आए, तो सतर्क हो जाएं। ऐसे वीडियो को तुरंत सच मानने के बजाय विश्वसनीय समाचार स्रोतों या संबंधित सरकारी एजेंसी से उसकी पुष्टि जरूर करें।

सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से करें व्यवहार

PIB ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सनसनीखेज वीडियो को बिना जांचे आगे न भेजें। AI तकनीक के दौर में फर्जी वीडियो बनाना पहले से आसान हो गया है, इसलिए हर वायरल कंटेंट की सच्चाई परखना जरूरी है। एक छोटी-सी सावधानी गलत सूचना फैलने से रोक सकती है और लोगों को भ्रमित होने से बचा सकती है।