हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 171 को लेकर पुष्प विहार कॉलोनी के प्लॉट धारकों का गुस्सा अब सड़क से लेकर प्राधिकरण के दरवाजे तक पहुंच गया है। प्लॉट धारकों का आरोप है कि वे करीब 33 वर्षों से योजना के फेर में फंसे हुए हैं, लेकिन तमाम प्रक्रियाओं, बैठकों और राशि जमा होने के बावजूद उन्हें अब तक योजना से मुक्ति नहीं मिली।पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉट धारक समूह ने IDA पहुंचकर योजना क्रमांक 171 को जल्द समाप्त करने और इसका विधिवत प्रकाशन राजपत्र में कराने की मांग की है। यह मामला नया नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड में भी योजना क्रमांक 171 से जुड़ा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। 2016 के विधानसभा रिकॉर्ड में पुष्प विहार कॉलोनी को लेकर योजना 171 और पूर्व की योजना 132 का उल्लेख मिलता है।
‘राशि पूरी जमा करा दी, फिर भी मुक्ति क्यों नहीं?’
प्लॉट धारकों की ओर से दिए गए आवेदन में दावा किया गया है कि 22 दिसंबर 2024 को योजना से संबंधित पूरी प्रतिफल राशि जमा करा दी गई थी। इसके बावजूद योजना से मुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर प्लॉट धारकों ने सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि जब प्राधिकरण को मिलने वाली राशि जमा हो चुकी है, तो फिर योजना को समाप्त करने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में लगातार देरी क्यों हो रही है?यही सवाल अब IDA के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द बनता दिखाई दे रहा है।
कभी 132, फिर 171… दशकों से कागजों में उलझे प्लॉट
पुष्प विहार कॉलोनी का मामला दशकों पुराना है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक क्षेत्र में पहले योजना क्रमांक 132 लाई गई थी और बाद में योजना क्रमांक 171 अस्तित्व में आई। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी पुष्प विहार कॉलोनी और योजना 171 से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।यानी जिस जमीन पर लोग अपने घर बनाकर रह रहे हैं, उसी जमीन की स्थिति को लेकर वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक उलझन बनी रही।2024 में भी योजना 171 को छोड़ने की प्रक्रिया को लेकर राहत की खबर सामने आई थी। उस समय IDA की ओर से योजना को डीनोटिफाई करने की तैयारी और शासन की मंजूरी का उल्लेख किया गया था।लेकिन अब प्लॉट धारकों का कहना है कि कागजों में राहत की बात और जमीन पर वास्तविक राहत के बीच अभी भी लंबी दूरी है।
8 अगस्त 2025 की बोर्ड बैठक पर भी उठे सवाल
प्लॉट धारकों ने IDA की 8 अगस्त 2025 की बोर्ड बैठक में योजना 171 को लेकर लिए गए निर्णय पर भी सवाल खड़े किए हैं।उनका आरोप है कि योजना से मुक्ति के लिए समिति बनाई गई थी और समिति ने अपनी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की, लेकिन इसके बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ा।प्लॉट धारकों के मुताबिक बोर्ड के सामने प्रतिफल राशि जमा होने का तथ्य पूरी तरह स्पष्ट था, इसके बावजूद योजना को तत्काल मुक्त करने की दिशा में निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।
‘सोसायटियों की जांच का योजना से क्या लेना-देना?’
प्लॉट धारकों के विरोध का एक बड़ा मुद्दा सहकारी संस्थाओं की जांच और ऑडिट है।उनका आरोप है कि योजना से जुड़ी सहकारी संस्थाओं की जांच और लंबित ऑडिट को योजना से मुक्ति में देरी का आधार बनाया जा रहा है।प्लॉट धारकों का तर्क है कि संस्थाओं की जांच एक अलग प्रशासनिक प्रक्रिया है और योजना से मुक्ति का निर्णय उससे अनिश्चितकाल तक नहीं जोड़ा जा सकता।अपने आवेदन में उन्होंने इसी आधार पर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है।वहीं उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक योजना में शामिल कई सहकारी संस्थाओं के ऑडिट और रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग स्थिति रही है, जिसकी वजह से प्रशासनिक प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।
6 हजार प्लॉट धारकों की परेशानी का मुद्दा
हालिया रिपोर्टों में योजना 171 से प्रभावित करीब 6 हजार प्लॉट धारकों का उल्लेख किया गया है। जुलाई 2026 में भी प्रभावित प्लॉट धारकों ने आंदोलन की चेतावनी देते हुए योजना से मुक्ति की मांग उठाई थी।यानी यह सिर्फ कुछ लोगों की समस्या नहीं है।हजारों परिवारों की जमीन, मकान और भविष्य का सवाल इस योजना से जुड़ा बताया जा रहा है।यही वजह है कि अब प्लॉट धारकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्लॉट खरीदा, घर बनाया… फिर भी योजना का ‘फंदा’ नहीं निकला
पुष्प विहार कॉलोनी से जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड में यह भी सामने आता है कि कॉलोनी में लंबे समय से आवासीय विकास और भूखंडों से जुड़े विवाद रहे हैं। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में कॉलोनी के विकास, भूखंडों और योजना 171 में शामिल किए जाने को लेकर विस्तृत विवाद दर्ज है।यही वजह है कि प्लॉट धारक अब सवाल उठा रहे हैं-जब कॉलोनी में घर बने हैं, लोग रह रहे हैं, राशि जमा हो चुकी है, तो योजना से मुक्ति के लिए और कितनी पीढ़ियां इंतजार करेंगी?
विशेष बोर्ड बैठक बुलाने की मांग
प्लॉट धारकों ने अब मांग रखी है कि IDA की विशेष बोर्ड बैठक बुलाकर योजना क्रमांक 171 को तत्काल समाप्त किया जाए।इसके बाद नियमानुसार अधिसूचना जारी कर योजना से मुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए और इसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाए।उनका कहना है कि वर्षों से लंबित इस विवाद का अब कोई अंतिम समाधान होना चाहिए। IDA के लिए बड़ा सवाल-राशि जमा होने के बाद भी आखिर क्यों अटकी है योजना 171?पुष्प विहार के प्लॉट धारकों का आक्रोश अब सिर्फ एक शिकायत नहीं रह गया है। यह सवाल IDA की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा हो रहा है।
आश्वासन नहीं, अंतिम निर्णय चाहिए
अगर पूरी प्रतिफल राशि जमा होने का दावा है, समिति रिपोर्ट दे चुकी है और योजना को समाप्त करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है, तो फिर अंतिम फैसला क्यों नहीं हो रहा? दूसरी तरफ सहकारी संस्थाओं की जांच और ऑडिट से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए अब जरूरत है कि IDA पूरे मामले पर स्पष्ट टाइमलाइन और लिखित स्थिति सामने रखे।33 साल का इंतजार… अब प्लॉट धारक पूछ रहे हैं—योजना खत्म होगी या फाइलों में ही चलती रहेगी?पुष्प विहार के प्लॉट धारकों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, अंतिम निर्णय चाहिए। और यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है-क्या योजना क्रमांक 171 से हजारों परिवारों को अब वास्तविक मुक्ति मिलेगी, या फिर एक बार फिर बोर्ड बैठक, जांच और फाइलों के बीच मामला उलझ जाएगा?
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