नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की पहचान पुराने भारत विरोधी राजनेता की रही है. 2022 में बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का मैप साझा किया था. काठमांडू के मेयर रहते बालेन ने आदिपुरुष फिल्म को वहां के सिनेमाघरों में रिलीज नहीं होने दिया था. शाह भारत के खिलाफ लगातार फैसला ले रहे हैं. अब उन्होंने भारत और नेपाल सीमा को लेकर एक नया सख्त नियम लागू करने की घोषणा की है. इसके तहत भारत से नेपाल जाने वाले भारतीयों को हर वक्त अपना पहचान पत्र रखना होगा. उन्हें जरूरी सुरक्षा जांच से भी गुजरना होगा.
बालेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह माना जा रहा था कि भारत से उनके रिश्ते ठीक होंगे, लेकिन हालिया फैसलों ने इसको लेकर सस्पेंस गहरा दिया है.
27 मार्च को बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री नियुक्त हुए थे, तब से अब तक पिछले 45 दिनों में बालेन ने 4 ऐसे फैसले लिए हैं, जिसे भारत विरोधी माना जाता है. बालेन प्रधानमंत्री बनने से पहले खुलकर भारत का विरोध कर चुके हैं. 2022 में उन्होंने ग्रेटर नेपाल का मैप शेयर किया था.
फर्स्ट, नेपाल के प्रधानमंत्री ने कालापानी और लिपुलेख के पुराने मसले को फिर से उठाया है. बालेन शाह ने मानसरोवर यात्रा को लेकर चीन की तरफ से जारी एडवाइजरी के संदर्भ में यह कहा कि नेपाल से इसको लेकर कोई सहमति नहीं है. नेपाल कालापानी के इलाकों पर अपना दावा करता रहा है.
सेकंड, काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मिलने से इनकार कर दिया. मिस्री इसी हफ्ते नेपाल जाने वाले थे. इस दौरे का मकसद नेपाल और भारत के विदेश नीति को मजबूत करना था, लेकिन शाह ने सिर्फ समकक्ष के साथ ही बैठक करने की बात कही, जिसके बाद मिस्री का दौरा रद्द हो गया.
थर्ड, भारत से नेपाल के तराई प्रांत में रहने वाले मधेश नागरिक जरूरत के सामान खरीदकर ले जाते थे. इससे उन पर महंगाई का ज्यादा असर नहीं होता था, लेकिन बालेन की सरकार ने एक नियम लागू कर दिया. इसके मुताबिक अगर भारत से 100 रुपए से ज्यादा का सामान ले जाया जाता है तो कस्टम वसूला जाएगा. इसके कारण बॉर्डर इलाके के नागरिक काफी ज्यादा परेशान हैं.
फ़ोर्थ, नेपाल सरकार ने एक और नियम लागू कर दिया है. पहले भारतीय सीमा के पास रहने वाले नागरिक आसानी से नेपाल जा सकते थे. अब उन्हें नेपाल जाने के लिए अपना पहचान पत्र रखना होगा. बिना जांच के भारतीय नागरिक नेपाल नहीं जा सकते हैं. भारत और नेपाल के बीच 1751 किलोमीटर की खुली सीमा है.
भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री का प्रस्तावित काठमांडू दौरा अचानक टालकर बालेन शाह सरकार को पहला बड़ा झटका दे दिया है. 11 मई से होने वाले इस दौरे के रद्द होने के पीछे बालेन शाह की खराब विदेश नीति और लिपुलेख सीमा विवाद को बड़ी वजह माना जा रहा है.
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