कुंदन कुमार/ पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक जीवन में सादगी और संसाधनों की बचत, विशेषकर ईंधन संरक्षण को लेकर की गई अपील का सकारात्मक असर अब बिहार की राजनीति में दिखने लगा है। पटना की सड़कों पर जो मंत्री कभी गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ निकलते थे, अब वे सादगी की मिसाल पेश कर रहे हैं। इस बदलाव की कमान संभाली है बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने।

​एक गाड़ी, एक संदेश: अशोक चौधरी की नई पहल

​हाल ही में मंत्री अशोक चौधरी को पटना में अपने कार्यालय जाते समय मात्र एक गाड़ी का उपयोग करते देखा गया। उनके काफिले से अतिरिक्त सुरक्षा वाहनों और वीआईपी गाड़ियों का तामझाम गायब था। जब उनसे इस बदलाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम प्रधानमंत्री मोदी की उस अपील के सम्मान में है, जिसमें उन्होंने देश के संसाधनों को बचाने और फिजूलखर्ची रोकने का आग्रह किया था। चौधरी ने कहा, “पीएम मोदी जी ने जो अपील की है, वह बेहद सराहनीय है। हम उनके विजन को ध्यान में रखकर ही कार्य कर रहे हैं।”

​सुरक्षा और सादगी के बीच संतुलन

​अशोक चौधरी ने सादगी के साथ-साथ व्यावहारिक सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के भीतर और सामान्य कार्यक्रमों के लिए एक गाड़ी पर्याप्त है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब मंत्रियों को पटना से बाहर या संवेदनशील इलाकों के दौरे पर जाना होता है, तो सुरक्षा कारणों से दो या अधिक वाहनों का होना अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने कहा, “शहर में रहते हुए हमें अतिरिक्त गाड़ियों की आवश्यकता नहीं है, लेकिन बाहरी दौरों पर सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होता है।”

​सियासत में सादगी का नया दौर

​अशोक चौधरी का यह कदम बिहार कैबिनेट के अन्य मंत्रियों के लिए भी एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। आमतौर पर ‘मंत्री कल्चर’ में बड़े काफिले को रसूख की निशानी माना जाता है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह धारणा बदल रही है। ईंधन की बचत न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। बिहार सरकार के मंत्री द्वारा पीएम की अपील को जमीन पर उतारना यह दर्शाता है कि सत्ता के गलियारों में अब ‘दिखावे’ से ज्यादा ‘दायित्व’ को प्राथमिकता दी जा रही है।