बंगाल की राजनीति में आज बड़ा बदलाव हो गया है. बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री बन गए है. सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में पूर्व सीएम ममता बनर्जी को हराया था. पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बीजेपी सरकार का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन नबीन जैसे NDA सरकार के 20 से अधिक मुख्यमंत्रियों ने भी हिस्सा लिया. पीएम मोदी की मौजूदगी में यह शपथ ग्रहण हुआ. लेकिन इस शपथ ग्रहण से पहले एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे वहां उन्होंने एक बुजुर्ग शख्स को पहले गले लगाया, फिर पांव छुए और फिर काफी देर तक उनके साथ स्नेह से गले लगे रहे. इस दौरान बुजुर्गवार की आंखें नम हो गईं. वहीं ये नजारा तुरंत ही सुर्खियों में तब्दील हो गया. सवाल पूछा जाने लगा कि पीएम मोदी ने शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण मंच पर आखिर किसे गले लगाया?
सबसे बुजुर्ग बीजेपी कार्यकर्ता के पीएम मोदी ने छुए पैर
जानकरी के अनुसार मंच पर प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का आशीर्वाद लिया है. 98 वर्ष की आयु के माखनलाल सरकार आज़ादी के बाद भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती जमीनी कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं.
साल 1952 में वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर में तिरंगा फहराने के आंदोलन में शामिल हुए थे. इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. 1980 में बीजेपी के गठन के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों का संगठन समन्वयक बनाया गया. केवल एक साल के भीतर उन्होंने करीब 10 हजार नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. 1981 से लगातार सात वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया. उस दौर में यह एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि आमतौर पर बीजेपी नेता किसी एक संगठनात्मक पद पर दो साल से अधिक समय तक नहीं रहते थे.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ देखा था बंगाल निर्मण का सपना
बता दें कि, सिलीगुड़ी के डाग गांव निवासी माखनलाल सरकार, करीब 1945 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं. उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ काम किया और बंगाल में राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के शुरुआती संघर्षों के साक्षी रहे. आज जिस “बंगाल निर्माण” की बात बीजेपी करती है, उसी सपने को माखन लाल सरकार ने दशकों पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर देखा था.
मंदिर आंदोलन से मंदिर निर्माण तक की यात्रा देखी
उस दौर में बंगाल में आरएसएस या संघ की पहचान बहुत सीमित थी, लेकिन माखन लाल सरकार लगातार संगठन के कामों में सक्रिय रहे. उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और अनेक ऐतिहासिक घटनाओं के प्रत्यक्ष गवाह बने.
राम मंदिर के लिए आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक की पूरी यात्रा उन्होंने अपनी आंखों से देखी. यहां तक कि शिला पूजन भी उनके घर के आंगन में हुआ था. अब उनकी पत्नी और बच्चे उन यादों को भावुक होकर साझा कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि कल ही पार्टी की ओर से निर्देश आया था कि माखन लाल सरकार को शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहना है. इसके बाद उनके छोटे बेटे उन्हें लेकर कोलकाता रवाना हुए.
भावुक हुआ परिवार
सुबह से उनकी पत्नी पुतुल सरकार और बेटे मणिक सरकार टीवी के सामने बैठे रहे. जब प्रधानमंत्री ने मंच पर माखन लाल सरकार को गले लगाया और उनका आशीर्वाद लिया, तो परिवार की आंखें नम हो गईं. परिवार ने भावुक होकर कहा, “बाबाजी ने जिस संघर्ष की शुरुआत की थी, जिन आदर्शों के साथ जीवन बिताया था, आज पिता जी ने उन्हीं आदर्शों को स्थापित होते अपनी आंखों से देखा है.”
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