Dharm Desk – देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा पूरे जोरों पर है. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, इसके साथ ही श्रद्धालु राज्य के अन्य प्राचीन और अलौकिक धार्मिक स्थलों की ओर भी रुख कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है टिहरी गढ़वाल की शांत वादियों में स्थित बूढ़ा केदारधाम जिसे उत्तराखंड का ‘पांचवां धाम’ भी कहा जाता है. यह पवित्र स्थल बालगंगा और धर्मगंगा नदियों के संगम पर बसा हुआ है. यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. खास बात यह है कि इस मंदिर के कपाट वर्षभर खुले रहते है. जिससे चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

मंदिर की अनोखी परंपरा

मंदिर की एक अनोखी परंपरा इसे और विशेष बनाती है, सदियों से यहां पूजा-अर्चना का दायित्व केवल नाथ संप्रदाय के योगियों के पास है. यह परंपरा आज भी पूरी आस्था के साथ निभाई जा रही है. जो इस धाम की विशिष्ट पहचान बन चुकी है.

महाभारत काल से जुड़ा है धाम का इतिहास

बूढ़ा केदार धाम का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि युद्ध के बाद पांडवों को गोत्र हत्या और स्वजन हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की तलाश थी, इसी दौरान देवों के देव महादेव ने उन्हें एक वृद्ध ब्राह्मण के रूप में दर्शन दिए और अंतर्ध्यान होकर शिवलिंग में समाहित हो गए. इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम ‘बूढ़ा केदार’ पड़ा.

स्कंद पुराण उल्लेख

स्कंद पुराण के केदारखंड में भी इस धाम का उल्लेख मिलता है. जहां इसे सोमेश्वर महादेव के रूप में वर्णित किया है. मान्यता यह भी है कि बूढ़ा केदार के दर्शन किए बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी मानी जाती है.

कैसे पहुंचे बूढ़ा केदार धाम

बूढ़ा केदार धाम टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित है. यह टिहरी शहर से लगभग 60 किलोमीटर और ऋषिकेश से करीब 120 किलो मीटर की दूरी पर है. यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश या देहरादून से सड़क मार्ग के जरिए बस या टैक्सी आसानी से मिल जाती है. नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और देहरादून हैं. जबकि निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) है. जहां से सड़क मार्ग द्वारा धाम तक पहुंचा जा सकता है.