बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना के मरीजों के लिए जल्द ही एक अत्याधुनिक लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर शुरू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचते ही महज 15 मिनट के भीतर विशेषज्ञ चिकित्सा मिलनी शुरू हो जाएगी। वर्तमान में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को तैयार करने की जिम्मेदारी हड्डी रोग विभाग को सौंपी गई है, जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
एक छत के नीचे मिलेंगी छह प्रमुख विशेषज्ञ सेवाएं
नए ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने से मरीजों को अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने की मजबूरी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। इस एकीकृत व्यवस्था के तहत छह प्रमुख विशेषज्ञ विभागों को एक साथ जोड़ा जा रहा है, जिनमें न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी शामिल हैं। इसके साथ ही मरीजों के लिए तत्काल पैथोलॉजिकल जांच, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और ब्लड बैंक की सुविधाएं भी एक ही परिसर में सुलभ होंगी।
मल्टीपल इंजरी के मरीजों के लिए होगा वरदान
फिलहाल पीएमसीएच में रोजाना औसतन 15 से 20 गंभीर ट्रॉमा के मरीज आते हैं, जिनका इलाज पारंपरिक ट्रायज सिस्टम के जरिए किया जाता है। हालांकि, सिर, रीढ़ और शरीर के कई अंगों में एक साथ गंभीर चोट (मल्टीपल इंजरी) लगने की स्थिति में अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल बिठाने में काफी कीमती समय बर्बाद होता है। नए ट्रॉमा सेंटर के अस्तित्व में आने के बाद मरीज के अस्पताल में कदम रखते ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समर्पित टीम तुरंत हरकत में आ जाएगी, जिससे दूसरे अस्पतालों में मरीजों को रेफर करने की जरूरत में भी भारी कमी आएगी।
बिहार में सड़क हादसों की विभीषिका और अधूरा ट्रॉमा नेटवर्क
राज्य में सड़क हादसों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 8,873 लोगों की जान चली जाती है और 6,539 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डन ऑवर जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने साल 2023 में प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 11 नए ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का खाका तैयार किया था, जबकि इससे पहले पीएमसीएच समेत राज्य के 10 अन्य मेडिकल कॉलेजों को लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया जा चुका है।



