अहमदाबाद। गुजरात पुलिस के इतिहास में पहली बार पुलिसकर्मियों के पारिवारिक जीवन और मानसिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और मानवीय निर्णय लिया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेन्द्र सिंह मलिक ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक साथ 415 पुलिस कर्मचारियों की स्व-याचिका (स्व-विनंती) पर तबादले के आदेश जारी किए हैं। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब पुलिस महकमे या सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को एक-दूसरे से दूर नहीं रहना पड़ेगा।
कठिन ड्यूटी और पारिवारिक तालमेल
पुलिस सेवा की कठिन और अनिश्चित ड्यूटी के कारण कर्मचारियों को अक्सर लंबे समय तक अपने परिवारों से दूर रहना पड़ता है। अलग-अलग जिलों या इकाइयों में तैनाती के चलते, दंपति के सरकारी सेवा में होने के बावजूद वे अलग रहने को मजबूर थे। इससे बच्चों के पालन-पोषण, बुजुर्गों की देखरेख और दांपत्य जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। डीजीपी के इस कदम से पुलिसकर्मी अब अपने परिवार के पास रहकर कर्तव्य का पालन कर सकेंगे, जिससे ड्यूटी और निजी जीवन में बेहतर संतुलन बनेगा।
6 अलग-अलग कैडर के कर्मचारियों को लाभ
राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस तबादला सूची में 6 अलग-अलग कैडर के पुलिसकर्मी शामिल हैं:
- सहायक उप-निरीक्षक (ASI): 27 (हथियारधारी और गैर-हथियारधारी)
- हेड कांस्टेबल: 33 (हथियारधारी और गैर-हथियारधारी)
- गैर-हथियारधारी कांस्टेबल: 226
- हथियारधारी कांस्टेबल: 129
मानसिक तनाव में आएगी कमी
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस निर्णय से पुलिसकर्मियों के भीतर मानसिक तनाव कम होगा और पारिवारिक संतुष्टि बढ़ेगी। अपनी पसंदीदा जगह और गृह जिलों में नियुक्ति मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार देखने को मिलेगा। गुजरात पुलिस की इस संवेदनशील पहल की चारों ओर सराहना हो रही है।
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