गुजरात के सूरत शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। योजना के तहत गरीब और बेघर लोगों को दिए गए पक्के मकानों को उनके मालिकों द्वारा दूसरों को किराए पर देने का भंडाफोड़ हुआ है। जिला प्रशासन को इस संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान 175 ऐसे मकान चिन्हित किए गए हैं।

जांच अभियान में हुआ खुलासा

सूरत जिला प्रशासन को सूचना मिली थी कि कई लाभार्थियों ने आवास का आवंटन मिलने के बावजूद खुद वहां रहने के बजाय उन्हें कमाई का जरिया बना लिया है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की टीम ने पीएम आवास योजना की सोसायटियों में घर-घर जाकर औचक सर्वे किया। सर्वे के दौरान जब वहां रह रहे लोगों के दस्तावेजों की जांच की गई, तो यह कड़वी सच्चाई सामने आई कि करीब पौने दो सौ मकानों में असली मालिक नहीं, बल्कि किराएदार रह रहे हैं।

आवंटन रद्द करने की तैयारी

पीएम आवास योजना के नियमों के अनुसार, ये घर केवल जरूरतमंद परिवारों के रहने के लिए आवंटित किए जाते हैं और इन्हें बेचना या किराए पर देना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले 175 मकान मालिकों की सूची तैयार कर ली गई है।

प्रशासन अब इन सभी आवंटियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, नियम तोड़ने वाले मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके मकानों का आवंटन रद्द कर उन्हें दोबारा जरूरतमंदों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े रुख से आवास योजना का गलत फायदा उठाने वालों में हड़कंप मच गया है।

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