सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में वन संपदा की अवैध तस्करी के खिलाफ पुलिस और वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई की है। चितरंगी के करथुआ वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सकरिया में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर एक ट्रक भरकर ले जाई जा रही लाखों रुपये की कीमती ‘खैर’ की लकड़ी जब्त की है। इस छापेमारी के दौरान टीम ने वाहन चालक के साथ-साथ इस पूरे अंतर्राज्यीय रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड को भी रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।

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हरियाणा से आकर सिंगरौली में बिछाया था जाल, कानपुर-मेवात में थी सप्लाई

पकड़े गए मुख्य आरोपी की पहचान हुनूर खान के रूप में हुई है जो हरियाणा के नूह का रहने वाला है। आरोपी ने सिंगरौली के स्थानीय जंगलों और क्षेत्र के किसानों को अपने जाल में फंसा रखा था। वह किसानों से ऊंचे दामों पर खैर की लकड़ी खरीदता था। इसके बाद अवैध रूप से पेड़ों की कटाई करवाकर लकड़ी को छोटे टुकड़ों में काटकर सप्लाई करता था।

वन अमले-पुलिस की कार्रवाई में हुआ भंडाफोड़

इस खेप को ट्रक के जरिए कानपुर, मेवात और झज्जर सहित देश के अन्य बड़े बाजारों में सप्लाई करने की तैयारी थी, लेकिन परिवहन से ठीक पहले पुलिस और वन अमले ने दबिश देकर पूरे खेल का भंडाफोड़ कर दिया।

कत्था और गुटका उद्योग में भारी डिमांड

वन विशेषज्ञों के मुताबिक खैर की लकड़ी अत्यंत मूल्यवान और प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कत्था-गुटका उद्योग, कॉस्मेटिक (सौंदर्य) उत्पाद, दवा निर्माण, केमिकल और पेंट इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर किया जाता है। बाजार में इसकी कीमत बहुत ज्यादा होने के कारण अंतर्राज्यीय तस्कर लंबे समय से सिंगरौली और आसपास के वनांचलों को अपना निशाना बना रहे थे।

थाना प्रभारी और रेंजर की मुस्तैदी से मिली बड़ी कामयाबी

इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने में चितरंगी थाना प्रभारी सुदेश तिवारी और वन परिक्षेत्र अधिकारी रविशेखर सिंह के साथ उनकी टीम की मुख्य भूमिका रही। अधिकारियों की सतर्कता और कुशल नेतृत्व के चलते वन तस्करों का यह बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो सका है।

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प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि इस मामले में अभी कई और स्थानीय चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं जिनकी जांच की जा रही है। वन अधिनियम के तहत आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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