भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में राज्य के पहले ‘स्काईवॉक’ प्रोजेक्ट का शिलान्यास होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. रसुलगढ़ से पलाशुणी के बीच करीब 18.42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस आधुनिक स्काईवॉक और 3 फुट ओवरब्रिज के निर्माण कार्य की शुरुआत के साथ ही एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है.

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने तीखा रुख अख्तियार कर लिया है. विपक्ष का आरोप है कि इस विकास कार्य के आधिकारिक शिलान्यास समारोह को सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने दलीय मंच में तब्दील कर दिया. आरोप यह भी है कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए स्थानीय निर्वाचित विधायकों को कार्यक्रम में उचित तवज्जो और सम्मान नहीं दिया गया. इसके विपरीत, किसी भी संवैधानिक पद पर न रहने वाले गैर-निर्वाचित व्यक्तियों को मंच पर प्रमुखता से स्थान दिए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
दूसरी तरफ, इस परियोजना के बहाने भुवनेश्वर बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी और कलह भी खुलकर सामने आ गई है. पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं. दरअसल, भुवनेश्वर की सांसद अपराजिता सारंगी की भूमिका को लेकर पार्टी के एक धड़े में गहरा असंतोष देखा जा रहा है.
चर्चा है कि सांसद सारंगी ने भुवनेश्वर बीजेपी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता जगन्नाथ प्रधान को दरकिनार कर दिया है. इसके बजाय, हाल ही में बीजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रुद्र नारायण सामंतराय को सरकारी मंच पर अधिक महत्व दिया गया. पार्टी के लिए सालों से जमीन पर काम करने वाले पुराने नेताओं को छोड़, नए चेहरों को इस तरह तरजीह मिलने से पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ देखी जा रही है. बहरहाल, विकास की इस बड़ी योजना पर शुरू हुआ यह सियासी विवाद आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.

