शब्बीर अहमद, भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीयन को लेकर एकबार फिर सियासी घमासान मच गया है। आरएसएस (RSS) के पंजीयन की सियासी बयानबाजी दक्षिण भारत से मध्य भारत तक पहुंच गई है। मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरएसएस (RSS) को लेकर कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खड़गे के बयान का समर्थन किया है।

हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

मामले को लेकर दिग्विजय सिंह ने सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में RSS के पंजीयन, वित्तीय स्रोतों और कर अनुपालन पर सवाल उठाए है। उन्होंने पत्र में लिखा- लोकतंत्र में कोई भी संस्था जवाबदेही से ऊपर नहीं है। 250 करोड़ की लागत से बन रहा आरएसएस कार्यालय के पैसे कहां से आए? कोविड काल में RSS द्वारा किए गए खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।

सनातन धर्म की तुलना उचित नहीं

RSS और सनातन धर्म की तुलना उचित नहीं, देश की सभी संस्थाओं की तरह RSS पर भी समान नियम लागू हों। डॉ मोहन भागवत को लिखे पत्र का अब तक जवाब नहीं मिलने का भी दावा किया है। संविधान, पारदर्शिता और कानून के शासन के तहत जवाबदेही जरूरी है। RSS से कानूनी स्थिति, संगठनात्मक ढांचा और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की है। 2021 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र का भी हवाला दिया है।

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