अजय सैनी, भिवानी। स्थानीय चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय में छात्र सुविधाओं को लेकर चल रही खींचतान अब श्रेय लेने की सियासत में बदल गई है। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष मंजीत लांगायन ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पर तीखा हमला बोला है। लांग्यान ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन आज जिन मांगों पर कार्रवाई करने का दावा कर रहा है, वह किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि एनएसयूआई के नेतृत्व में हजारों छात्रों के लंबे और कड़े संघर्ष की जीत है।

छात्रों के अधिकारों के लिए संगठन ने हर स्तर पर आवाज उठाई

एनएसयूआई जिला अध्यक्ष मनजीत लांग्यान ने पुराने घटनाक्रमों को याद दिलाते हुए कहा कि छात्रों के अधिकारों के लिए संगठन ने हर स्तर पर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई ने सिर्फ ज्ञापन नहीं दिए, बल्कि जब प्रशासन ने आंखें मूंद लीं तो खून से पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की तो हमें नजरबंद किया गया। अंत में 5 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और हमारी मांगों को जायज मानना पड़ा।

ज्ञापन में परीक्षा परिणामों में हो रही देरी

लांगायन ने साफ किया कि अगस्त 2024 में ही कुलपति को सौंपे गए ज्ञापन में परीक्षा परिणामों में हो रही देरी, गलत रिजल्ट, बेवजह री-अपीयर देने और छात्रों को जीरो नंबर थमाने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। इसी संघर्ष का नतीजा है कि आज प्रशासन इन व्यवस्थाओं को सुधारने पर मजबूर हुआ है। एबीवीपी को आड़े हाथों लेते हुए मंजीत लांगायन ने सवाल उठाया कि जब छात्र रिजल्ट की गड़बड़ियों से परेशान थे, कैंटीन और हॉस्टल के लिए तरस रहे थे और बसों की कमी से जूझ रहे थे, तब एबीवीपी का कोई बड़ा आंदोलन क्यों नहीं दिखा।

राष्ट्रीय मुद्दों का किया जिक्र

उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि जब नीट पेपर लीक से देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में था, तब भी भिवानी में एबीवीपी सड़कों पर छात्रों के साथ खड़ी नहीं दिखाई दी। इसके अलावा, एससी-बीसी और अन्य आरक्षित वर्गों की छात्रवृत्तियां सालों से रुकी हुई हैं, लेकिन इस पर भी विद्यार्थी परिषद ने चुप्पी साधे रखी।

लांगायन ने आरोप लगाया कि जैसे ही छात्रों के संघर्ष से कोई मांग पूरी होने की कगार पर पहुंचती है, एबीवीपी श्रेय लूटने की राजनीति में जुट जाती है। एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन मुख्य रूप से छात्रों की बुनियादी और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर था।

इनकी प्रमुख मांगें

  • परीक्षा परिणाम जारी करने की एक निश्चित समय सीमा तय हो।
  • छात्र शिकायतों के समाधान के लिए डेडलाइन निर्धारित की जाए।
  • छात्रों को समय पर उनकी डीएमसी और डिग्रियां उपलब्ध कराई जाएं।
  • परीक्षा शुरू होने से कम से कम 10 दिन पहले एडमिट कार्ड जारी हों।
  • छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल, परमानेंट कैंटीन और बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • लंबित पड़ी सभी छात्रवृत्तियां तुरंत जारी की जाएं।

एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी किसी संगठन की जागीर नहीं है, बल्कि यह हजारों विद्यार्थियों के सपनों का केंद्र है। प्रशासन को राजनीति से ऊपर उठकर सिर्फ छात्रों के हित में सोचना चाहिए। अंत में लांग्यान ने चेतावनी देते हुए कहा कि भूख हड़ताल के दौरान जिन मांगों को पूरा करने का आश्वासन मिला था, अगर उन्हें तय समय के भीतर जमीन पर लागू नहीं किया गया, तो पूरे जिले के छात्रों को एकजुट करके इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।