मुकेश सेन, टीकमगढ़। जिले से एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान ने जिला प्रशासन से अपना “तालाब चोरी” होने की गुहार लगाई है। कागजों में किसान के खेत पर तालाब का निर्माण पूरा हो चुका है, मस्टर रोल दर्ज हैं और राशि भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन धरातल पर तालाब का नामोनिशान तक नहीं है।

पूरा मामला पलेरा जनपद की ग्राम पंचायत स्यावनी का है। यहाँ के निवासी किसान चतुर कुशवाहा जब दिल्ली से मजदूरी कर गांव लौटे, तो जनपद पंचायत की जांच टीम उनके घर पहुँची और खेत में बने तालाब के बारे में पूछा। यह सुनकर किसान हैरान रह गया क्योंकि उसके खेत में कभी कोई निर्माण हुआ ही नहीं था।

1.47 लाख की लागत, मस्टर रोल दर्ज

जांच में सामने आया कि 26 अप्रैल 2025 को किसान चतुर कुशवाहा के नाम पर 1,47,621 रुपये की लागत से ‘खेत तालाब’ स्वीकृत किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण और मस्टर रोल दर्ज दिखाए गए, पर मौके पर जमीन पूरी तरह खाली मिली।

रातों-रात जेसीबी चलाकर पड़ोसी की जमीन खोदी

मामला मीडिया के संज्ञान में आते ही हड़कंप मच गया। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने मामले को दबाने के लिए रात के अंधेरे में जेसीबी भेजकर खुदाई शुरू कराई, लेकिन जल्दबाजी में यह गड्ढा पीड़ित किसान की जगह पड़ोसी किसान सीताराम पाल की जमीन पर खोद दिया गया।

जांच के दिए आदेश

पलेरा जनपद पंचायत के सीईओ अरविंद कुमार बोरकर का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जा रही है। इस घटना ने ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर बिना तालाब बने कागजों में मस्टर रोल कैसे पास हो गया।

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