राकेश चतुर्वेदी की कलम से
जीत के लिए IAS तैयार कर रहे हैं फॉर्मूला
अगले साल से मध्यप्रदेश में चुनावों का मौसम शुरू हो जाएगा. चुनावी माहौल जमाने के लिए राजनैतिक दलों में तो फॉर्मूलों पर मंथन हो ही रहा है, लेकिन एक सीनियर आईएएस अफसर अपना अलग ही फॉर्मूला तैयार करने में लगे हैं. अपने मातहतों के बीच साहब ने दावा किया है वो पूरे जिले को लेकर फ़ॉर्मूला तैयार कर चुके हैं. उनके पास न सिर्फ जिलेभर के इनपुट्स हैं, बल्कि किस इलाके का क्या मूड है और किसे क्या चाहिए, इसकी प्रमाणित जानकारी भी वो जुटा चुके हैं. साहब अब जिले के आगे सम्भाग कार्यालय में बैठने की इच्छा जता रहे हैं, दावा है संभाग में मौका मिला तो पूरे संभाग के मतदाताओं का रुख तैयार करने में उन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा.
पॉवर गॉसिप: पानी के लिए पुराने दोषी… थाना प्रभारी का आईपीएस को धोखा… अब इंजीनियर भी कह गए गड्ढे तो होंगे ही… मंत्रीजी गायब
50 लाख का थाना
थाने की चाह रखने वाले इंसेक्टर्स के बीच ये चर्चा जोरों से जारी है. बात बताई तो जा रही है तीन महीने पुरानी, लेकिन चर्चा ने जोर अब पकड़ा है. चर्चा को लेकर सबके अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन आगे बढ़ने की बात बस इस चर्चा के साथ ही थम जाती है. जब भी चर्चा होती है तो जिक्र इस बात को लेकर भी हो ही जाता है कि आगे नहीं बढ़ पाने का लाभ वर्तमान थाना प्रभारी को तो मिल ही रहा है.
पॉवर गॉसिप : विपक्ष को भी तबादला नहीं तबादले करवाना है…नई प्रक्रिया के लिए अलग से पूरा कक्ष…गेहूं नहीं तुला तो कलेक्ट्रोरेट में ढेर लगवा दूंगा…बिना आग कांग्रेस में धुआं…
पानी का टैक्स या राजनीति की प्यास?
ग्वालियर के सत्ता गलियारों में इन दिनों एक चर्चा खूब तैर रही है. चर्चा नगर निगम की खाली तिजोरी और उसे भरने के लिए खोजे जा रहे नए रास्तों की है. सुना है कि नगर निगम अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जलकर में भारी बढ़ोतरी की तैयारी कर रहा हैं. अंदरखाने की मानें तो प्रस्ताव ऐसा है कि पानी का टैक्स लगभग दोगुना हो सकता है. वजह भी साफ है, निगम की आर्थिक हालत लगातार दबाव में है और आय के नए स्रोत तलाशे जा रहे हैं, लेकिन असली दिलचस्पी टैक्स बढ़ाने में नहीं, बल्कि उस राजनीति में है जो इसके इर्द-गिर्द घूम रही है.
चर्चा हैं कि 2027 के नगरीय निकाय चुनाव फिलहाल थोड़े दूर माने जा सकते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के हिसाब से अब ज्यादा दूर नहीं बचे. ऐसे में कांग्रेस की नगर सरकार के लिए यह प्रस्ताव किसी “गले की फांस” से कम नहीं माना जा रहा. एक तरफ निगम प्रशासन राजस्व बढ़ाने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ महंगाई से परेशान जनता पर पानी का अतिरिक्त बोझ डालना राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है.
उधर भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है. चर्चा है कि अगर प्रस्ताव MIC से होकर परिषद तक पहुंचता है, तो परिषद में मजबूत संख्या बल रखने वाली भाजपा इसे जनता के हित का मुद्दा बनाकर घेराबंदी कर सकती है. ऐसे में अगर प्रस्ताव अटकता है तो भाजपा खुद को “जनता का रक्षक” बताने का मौका नहीं छोड़ेगी. सवाल यही है कि आखिर अब कांग्रेस क्या करेगी? निगम की कमाई बढ़ाने के लिए टैक्स बढ़ाए या फिर चुनावी नुकसान के डर से कदम पीछे खींचे?फिलहाल निगम मुख्यालय से लेकर राजनीतिक चौपालों तक एक ही चर्चा है, पानी से ज्यादा गर्म तो पानी के टैक्स की राजनीति हो गई है.
पॉवर गॉसिप: आईएएस-आईपीएम के आसपास नेताओं की जमीनें भी तो हैं… कलेक्टर के पास आया फोन- गाड़ियां रोक दें… स्लाटर हाउस में नेताजी फिर सक्रिय… संगठन-सत्ता की कार्रवाई- नेताजी बोले भेदभाव
महाराज के क्लब में हाफ फ्राई का हाई-वोल्टेज ड्रामा, पूरे शहर में चर्चा!
ग्वालियर के रसूखदार लोगों की बैठकों में इन दिनों एक ही चर्चा चल रही है, आखिर ऐसा क्या हुआ कि जीवाजी क्लब में एक हाफ फ्राई पूरे शहर की गॉशिप बन गई. कहते हैं कि 128 साल पुराने इस क्लब की पहचान कभी बड़े लोगों की बैठकों, सियासी माहौल और समझदारी भरी चर्चाओं से होती थी. यहां सदस्यता मिलना भी अपने आप में रुतबे की बात मानी जाती रही है. लेकिन पिछले कुछ समय से क्लब अपनी उपलब्धियों से ज्यादा विवादों के कारण चर्चा में रहने लगा. वैसे भी यह कोई आम क्लब तो है नहीं. शहर में माना जाता है कि यह क्लब महाराज की सीधी नजर में रहता है, इसलिए जब क्लब के अंदर एक मामूली हाफ फ्राई को लेकर इतना हंगामा खड़ा हो जाए कि बात खबरनीशों तक पहुंच जाए तो चुटकी तो ली ही जाएगी.
अब शहर के लोग मजाक में कह रहे हैं कि क्लब की किचन से निकला हाफ फ्राई सीधे गलियारों तक पहुंच गया है. कोई कह रहा है कि क्लब में खाने से ज्यादा ईगो गर्म हो रही है, तो कोई कहता घूम रहा है कि अगर एक हाफ फ्राई इतना बवाल करा सकता है, तो पूरा डिनर क्या कर देगा! चर्चा यह भी है कि मामला सिर्फ एक ऑर्डर का नहीं है..जानकारों का कहना है कि हाफ फ्राई तो बस बहाना है, असली कहानी क्लब के अंदर चल रही खींचतान और नाराजगियों की है. वरना इतने बड़े और प्रतिष्ठित क्लब में खाने की एक प्लेट को लेकर इतना शोर शायद ही कभी सुनने को मिला हो. फिलहाल ग्वालियर में लोग मुस्कुराते हुए यही कह रहे हैं कि क्लब की मेज पर इस बार सबसे गर्म चीज हाफ फ्राई नहीं, बल्कि उससे पैदा हुआ विवाद है. अब देखना यह है कि यह मामला यहीं ठंडा पड़ता है या फिर आगे क्लब की कोई नई “स्पेशल डिश” फिर शहर को नया गॉशिप मसाला देती है.

