राजकुमार पाण्डेय की कलम से
आईएएस-आईपीएम के आसपास नेताओं की जमीनें भी तो हैंभोपाल में 50 आईएएस-आईपीएस की ओर एक जमीन खरीदने का मामला प्रकाश में आया तो अफसरों के आसपास की जमीनों की चर्चा भी होने लगी है. चर्चा में पूर्व मंत्रियों के साथ अन्य नेता और बिल्डरों की जमीनें होने का भी पता चला है और इसमें अलग-अलग दलों के नेता शामिल हैं. सवाल उठ रहे हैं कि क्या अफसरों के साथ नेताओं को भी बायपास निकलने की जानकारी थी. इधर, अफसरों की जमीन के कागजात सामने आने पर नेता-इन्वेस्टर्स को अपने कागजों की चिंता सताने लगी है.
कलेक्टर के पास आया फोन- गाड़ियां रोक दें
मंत्रीजी का प्रभार वाले जिले में दौरा तय हो रहा है. तारीख और बाकी प्लानिंग तय करने के लिए कलेक्टर को फोन किया गया. लंबी चर्चा होने के बाद कलेक्टर को फोन पर ही कह दिया गया कि मेरे साथ दो ही गाड़ियां रहेंगी. पीछे कोई गाड़ी साथ में न लगे, यह आपको ही सुनिश्चित करना है. इसकी कलेक्टर ने हां भी भर दी. प्रभारी मंत्री के दौरे को लेकर जब कलेक्टर ने बैठक ली तो सवाल आया कि मंत्रीजी एक से दूसरे स्थान पर गए तो अफसरों की गाड़ियां कहां चलेंगी. इसका हल निकालने के लिए कार्यक्रमों की संरचना में कुछ बदलाव किया जा रहा है.
स्लाटर हाउस में नेताजी फिर सक्रिय
भोपाल में गाय का मांस मिलने के बाद उठा तूफान शांत हुआ तो नेताजी फिर सक्रिय हो गए हैं. बैठकों का दौर चल पड़ा है तो भविष्य की रणनीति भी तय होने लगी है. बंद पड़े स्लाटर हाउस के आसपास गतिविधियां भी सुचारू रूप से चलने लगी हैं. मीटिंग कराने वाले कर्ताधर्ताओं का मानना है कि जब तक नए सिरे से मुददा न उठे तब तक तो गतिविधियों के जरिए लाभ लिया ही जा सकता है.
संगठन-सत्ता की कार्रवाई- नेताजी बोले भेदभाव
पीएम नरेंद्र मोदी की नसीहत का पालन नहीं करने पर मध्य प्रदेश में दो बड़ी कार्रवाई हुई, वहीं कुछ नेताओं को तलब किया गया. अब कार्रवाई के बजाय तलब करने को एक नेताजी भेदभव बता रहे हैं. एक साथ नेताओं को तलब करने की खबरें चलीं तो नेताजी सार्वजनिक स्थान पर कहते हुए नजर आए कि हम पर तो सीधी कार्रवाई कर दी और बाकियों को तलब कर खानापूर्ति की तैयारी है. नेताजी कार्रवाई के बजाय पूछताछ करने के समीकरण भी अपनी नजर से लोगों को समझाते नजर आए.

