राजकुमार पाण्डेय की कलम से

पानी के लिए पुराने दोषी

बात प्रदेश में सबसे अधिक चर्चा में रहे एक नगर निगम की है. जहां पानी के लिए लगातार हाहाकार मचा हुआ. शहर को पानी पिलाने की बात आई तो सीधी जिम्मेदारी महापौर की ही बनी. कुछ दिन तो यह ठीक-ठाक चला, लेकिन जब कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे तो महापौर ने यह मैसेज कन्वे कर सीधी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि इसके लिए पुराने दो महापौर दोषी हैं. अब आक्रोशित लोगों को शांत कराना हो या महत्वपूर्ण स्थान पर जवाब पेश करना हो, ऐसी स्थिति निर्मित होने पर महापौर जी पूर्व महापौरों पर सीधा ठीकरा फोड़ रहे हैं.

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थाना प्रभारी का आईपीएस को धोखा

घटना सोलाना सच है. पिछले दिनों जारी हुई एक महत्वपूर्ण जिले की थाना प्रभारियों की अदला-बदली में एक टीआई ने सीनियर आईपीएस को ही धोखा दे दिया. मनपसंद थानों की चाह में मीडिएटर की भूमिका से खूब वादे किए गए थे. भरोसे की बात तय होने पर मनचाही पोस्टिंग भी मिल गई, लेकिन थाना मिलने ही थाना प्रभारी की नियत बदली और मीडिएटर से हुए वादे से साफ मुकर गए. मीडिएटर तो ठहरा साहब का वफादार. ऐसे में आज भले ही थाना प्रभारी आईपीएस पर भारी पड़ गया हो, लेकिन भविष्य किसने देखा है.

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अब इंजीनियर भी कह गए गड्ढे तो होंगे ही

2025 में पूरे मध्यप्रदेश में गड्ढों वाले बयान पर जमकर सियासत हुई, लेकिन गड्ढों वाली बात अब विभाग के प्रमुख इंजीनियर्स को भी आम लगने लगी है. बैठक में इस मुद्दा पर बात चल ही रही थी कि साहब बोल पड़े गड्ढे तो होंगे ही. साहब के इतना बोलते हुए पहले तो बैठक में सन्नाटा छा गया. अब साहब ने कहा था तो बाकी इंजीनियर्स को भी साहब की हां में हां मिलाना ही था. बैठक के बाद भी गड्ढों वाली बात पर जमकर बातचीत का दौर चलता रहा.

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मंत्रीजी गायब

नई तारीख से तबादलों का दौर शुरू होगा और अधिक आवेदनों की संख्या वाले विभागों में एक विभाग के मंत्रीजी ने अभी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है. लोग बंगले से लेकर मंत्रालय में अधिक संख्या में आने-जाने लगे हैं. सब जगह मंत्रीजी को ढूंढा जाता है कि पहले ही मुलाकात हो जाए, लेकिन मजाल की कोई मंत्रीजी तक पहुंच सके. चर्चा है कि दूर से आने वाले जनप्रतिनिधियों ने यह बात पार्टी स्तर पर भी पहुंचा दी है.

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