आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने पार्टी के भविष्य को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार पार्टी का भविष्य अच्छा नहीं दिखता और यह धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। एक इंटरव्यू के दौरान, प्रशांत भूषण ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadda) सहित कुछ नेताओं से जुड़े सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के भीतर कथित असंतोष और मतभेदों का जिक्र किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में राज्यसभा टिकट वितरण को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं और भाजपा ने कुछ सांसदों की कमजोरियों का लाभ उठाया।
प्रशांत भूषण ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में पार्टी से अपने अलगाव और आंतरिक घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने बताया कि वे और उनके सहयोगी कभी अरविंद केजरीवाल तथा सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के साथ मिलकर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का हिस्सा रहे थे, लेकिन बाद में पार्टी की दिशा को लेकर मतभेद बढ़ते गए। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हुआ और नीतिगत फैसलों में पारदर्शिता की कमी देखने को मिली। उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार नेतृत्व द्वारा पार्टी के कुछ नेताओं को दरकिनार किया गया और उनके खिलाफ गलत आरोप लगाए गए। भूषण ने आगे दावा किया कि टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर भी विवाद हुआ, जिसके चलते उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़े और अंततः अलगाव की स्थिति बनी।
उन्होंने कहा कि पार्टी के शुरुआती दौर में वॉलंटियर्स की भागीदारी को लेकर असहमति बढ़ी और इसके बाद संगठन के भीतर मतभेद गहराते चले गए। प्रशांत भूषण ने दावा किया कि एक मामले में पार्टी के एक नेता के नाम से कथित रूप से गलत संदेश प्रसारित किए गए, जिसके बाद उस नेता को पार्टी से हटाए जाने की प्रक्रिया हुई। भूषण ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर आंतरिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े ढांचे में बदलाव किए गए, जिनमें आंतरिक लोकपाल जैसी व्यवस्था का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व और उनके बीच मतभेद मुख्य रूप से उम्मीदवार चयन और टिकट वितरण को लेकर थे, जिसके बाद उनके संबंधों में दूरी बढ़ी।
पैसे लेकर टिकट देंगे तो यह सब होगा: प्रशांत भूषण
एक यूट्यूब इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके अनुसार पार्टी का राजनीतिक भविष्य लंबा नहीं दिखता। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्यसभा टिकट वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राज्यसभा टिकट ऐसे लोगों को दिए गए जिन्हें बाद में “दबाव में लाया जा सकता है”। हालांकि उन्होंने अपने दावों में किसी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई गईं, जिनसे आंतरिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक दलों द्वारा सांसदों पर दबाव बनाए जाने और उनके कथित तौर पर पार्टी बदलने जैसे घटनाक्रम सामने आए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसे हालात के पीछे राजनीतिक और व्यक्तिगत कमजोरियों का फायदा उठाने जैसी परिस्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि उनके अनुसार अगर राजनीतिक दलों में पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होता है तो इसका असर संगठन की दीर्घकालिक स्थिरता पर पड़ सकता है। उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि किसी भी पार्टी के भविष्य पर जनता और समय ही अंतिम निर्णय लेते हैं।
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