सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुलकवार में विकास के दावों की हकीकत चौंकाने वाली है। यहां बेलहवा नदी पर आज भी पक्का पुल नहीं बन पाया है। मजबूरी में ग्रामीण हर साल बांस का अस्थायी पुल बनाकर अपनी जिंदगी दांव पर लगाते हैं।
कोरावल विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. रमा शंकर सिंह की पहल पर इस वर्ष भी बेलहवा नदी पर बांस का पुल तैयार कराया गया है, ताकि लोगों का आवागमन किसी तरह जारी रह सके। पिछले साल भी इसी तरह का पुल बनाया गया था, लेकिन प्रशासन के वादे कागजों से बाहर नहीं निकल सके।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पुल से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। बगदरा, नेवारी, मझिगवां, कुलकवार, लेदपुरवा, कमरौहा, झगरहिया और ख्माहडीह सहित करीब 12 से 15 हजार की आबादी इसी रास्ते पर निर्भर है। बरसात के दिनों में यही बांस का पुल उनकी जिंदगी और मौत के बीच की आखिरी डोर बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक एवं राज्य मंत्री राधा सिंह को आवेदन देकर पक्का पुल बनवाने की मांग की, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पिछले वर्ष चितरंगी के तत्कालीन सीईओ राहुल सैयाम ने भी मौके का निरीक्षण कर पुल निर्माण का भरोसा दिया था, लेकिन वह आश्वासन भी अधूरा रह गया।
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या 15 हजार लोगों की जिंदगी की कीमत एक पक्के पुल से भी कम है? आखिर कब तक ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इस बांस के पुल से नदी पार करने को मजबूर रहेंगे।
फिलहाल बांस का पुल तो बन गया है, लेकिन विकास का पुल आज भी अधूरा है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नींद कब टूटती है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा।
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