कुंदन कुमार, पटना। जन सुराज के सूत्रधार और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पटना पुलिस प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि आगामी चुनावों से ठीक पहले उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस कारण के पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। इस दौरान प्रशांत किशोर ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं और पीड़ितों को सीधे मीडिया के सामने प्रस्तुत किया, जिन्होंने अपनी आपबीती साझा की।
स्थानीय कार्यकर्ताओं के संगीन आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय निवासियों और जन सुराज से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पुलिसिया कार्रवाई की पोल खोली। वार्ड संख्या 22 की रहने वाली नेहा भूषण ने अपनी बात रखते हुए बताया कि वे लगातार प्रशांत किशोर के समर्थन में काम कर रही हैं। अचानक पुलिस के लोग उनके घर में घुस आए और उन्हें परेशान किया गया। पुलिस द्वारा यह बेतुका दावा किया गया कि वे स्थानीय निवासी नहीं हैं, जबकि उनका परिवार लंबे समय से वहीं रह रहा है। इस अनुचित हरकत के खिलाफ वे कानूनी और प्रशासनिक शिकायत दर्ज कराने जा रही हैं।
एक अन्य स्थानीय निवासी नवल ने अपनी डरावनी दास्तां सुनाते हुए बताया कि रात के करीब दो बजे थानेदार उनके घर पर पहुंचे और उन्हें जबरन थाने चलने को कहा। आधी रात को उन्हें गाड़ी में बैठाकर हिरासत में ले लिया गया। प्रशांत किशोर ने इस बात पर जोर दिया कि नवल जी को बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में रखा गया और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने व मतदान समाप्त होने के ठीक एक घंटे पहले उन्हें छोड़ा गया। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किस जुर्म में नवल बाबू को पकड़ा गया था।
एसएसपी और भाजपा पर मिलीभगत का आरोप
प्रशांत किशोर ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पुलिस के लोग भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उनके समर्थकों को तंग कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह वही एसएसपी हैं जिन्होंने एक नीट छात्रा की हत्या जैसी गंभीर घटना को भी आत्महत्या करार देने का प्रयास किया था।
सुनील कुमार चंद्रवंशी नामक कार्यकर्ता ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए तीन बार घर आई थी। पहली बार बेउर थाने में बैठाने के बाद भारी हंगामे के चलते उन्हें छोड़ दिया गया, और दूसरी बार तो लगभग 100 लोगों के साथ पुलिस उनके घर आ धमकी, लेकिन प्रशांत किशोर के वहां पहुंचने पर पुलिस को उल्टे पांव लौटना पड़ा। प्रशांत किशोर ने कहा कि एसएसपी पूरी तरह से भाजपा कार्यकर्ताओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। पुलिस को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि कुल 54 लोगों को डिटेन करने की इस कार्रवाई में आखिर कितने भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे।
प्रशासनिक उदासीनता और तीखा राजनीतिक हमला
प्रशांत किशोर ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब भी उन्होंने पटना के जिलाधिकारी (डीएम) और चुनाव ऑब्जर्वर को फोन किया, तो उन्होंने हमेशा फोन उठाया, लेकिन पटना के एसएसपी ने एक बार भी उनका फोन नहीं उठाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि एसएसपी साहब को राजनीति ही करनी है, तो उन्हें अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर चुनावी मैदान में उतर जाना चाहिए। पुलिस को यह जवाब देना ही होगा कि जिन 18 से अधिक स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया गया था, उन्हें किस आधार पर उठाया गया और बाद में क्यों छोड़ा गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में प्रशांत किशोर ने भाजपा पर चुनावी हार का दावा करते हुए कहा कि इस चुनाव में भाजपा इतनी बुरी तरह हारेगी कि वे भविष्य में यह अहंकार भरा बयान कभी नहीं दे पाएंगे कि वे किसी कुत्ता या बिल्ली को भी टिकट थमा देंगे तो वह चुनाव जीत जाएगा। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा की हार तय है और इसी के साथ सम्राट चौधरी के पद से हटने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा।


