प्रयागराज में चित्रकूट और मिर्जापुर मार्ग को बेहतर बनाने के लिए करीब 8,316 करोड़ रुपये की दो सड़क परियोजनाओं पर काम होगा. इनमें नैनी से मिर्जापुर बाईपास तक 80.79 किमी मार्ग को 4-लेन में विकसित किया जाएगा.

प्रयागराज. चित्रकूट और मिर्जापुर से जुड़ी सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए दो बड़ी परियोजनाओं पर काम होगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) दोनों रूटों पर करीब 8,316 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन हाईवे विकसित करेगा. गुरुवार को मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजनाओं के खाके पर चर्चा हुई.

इन सड़कों के बनने से प्रयागराज के साथ आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. इससे जाम से राहत के साथ यात्रा के समय और ईंधन की बचत होगी, जबकि धार्मिक पर्यटन, व्यापार और स्थानीय उद्योगों को भी लाभ मिलने की बात कही गई है.

ग्रीनफील्ड हाईवे बनेगा

प्रस्तावित हाईवे नया ग्रीनफील्ड और कंट्रोल्ड-एक्सेस हाईवे होगा. इसका निर्माण घनी आबादी वाले क्षेत्रों से अलग किया जाएगा. इससे प्रयागराज, राजापुर स्थित गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली और चित्रकूट धाम के बीच तेज और सीधा संपर्क स्थापित होगा.

नैनी-मिर्जापुर मार्ग

लेप्रोसी चौराहा, नैनी से मिर्जापुर बाईपास तक 80.79 किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए 4,495.43 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. मौजूदा 2-लेन मार्ग को 4-लेन किया जाएगा. टेढ़े मोड़ों को सीधा करने के साथ आवश्यकता के अनुसार बाईपास भी बनाए जाएंगे.

इससे विंध्याचल और मिर्जापुर जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ माल ढुलाई करने वाले भारी वाहनों को भी सुगम रास्ता मिलेगा. परियोजना से हादसों में कमी आने की बात भी कही गई है.

दक्षिण प्रयागराज पर जोर

बैठक में मंडलायुक्त ने कहा कि विकास का लाभ केवल उत्तरी प्रयागराज तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने दक्षिण प्रयागराज के नैनी क्षेत्र को भी परियोजना का सीधा लाभ दिलाने के लिए मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए.

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के उपाध्यक्ष ऋषि राज ने हाईवे को प्रस्तावित एयरोसिटी, नैनी इंडस्ट्रियल हब, लेप्रोसी चौराहा और प्रस्तावित मेट्रो रूट से बेहतर तरीके से जोड़ने का सुझाव दिया.

मिर्जापुर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए रिंग रोड और सिरसा क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत की जाएगी. इसका उद्देश्य बड़े मेलों के दौरान शहर में जाम की स्थिति को नियंत्रित करना है.

दोनों परियोजनाओं के रूट यानी अलाइनमेंट को मंत्रालय स्तर से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. अब स्थानीय स्तर पर संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर जमीन और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है.