कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से संविधान की प्रस्तावना हटाए जाने के दावों के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रस्तावना को पाठ्यक्रम से नहीं हटाया गया है। परिषद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के तहत विषयवस्तु का पुनर्गठन किया गया है।
NCERT ने क्या कहा?
NCERT के अनुसार, नई पुस्तकों में संविधान की प्रस्तावना सभी पाठ्यपुस्तकों के शुरुआती पन्नों में प्रकाशित है। इसके अलावा, प्रस्तावना कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम का भी हिस्सा बनी रहेगी। परिषद का कहना है कि नए ढांचे के तहत विषयों को अलग-अलग कक्षाओं में व्यवस्थित किया गया है, ताकि विद्यार्थियों को चरणबद्ध तरीके से अवधारणाएं समझाई जा सकें।
संवैधानिक मूल्यों पर रहेगा फोकस
NCERT ने बताया कि संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल्यों को कक्षा 6 से 8 के पाठ्यक्रम में पहले ही शामिल किया जा चुका है। विशेष रूप से कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है, जबकि कक्षा 10 में इन्हें और व्यापक रूप से पढ़ाया जाएगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘सेक्युलर’ और ‘सेक्युलरिज्म’ जैसे शब्दों के कथित तौर पर कम या हटाए गए उल्लेख को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष का आरोप है कि संविधान के मूल सिद्धांतों से जुड़े महत्वपूर्ण संदर्भों को कमजोर किया जा रहा है।
पाठ्यक्रम में नए बदलाव
NCERT ने स्पष्ट किया कि नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें भारतीय लोकतंत्र, चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर अधिक व्यापक सामग्री जोड़ी गई है। साथ ही, पहली बार कक्षा 9 की पुस्तक में 1975-77 के आपातकाल पर एक अलग अध्याय शामिल किया गया है, जिसमें इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, नकली NCERT पुस्तकों से सावधान रहने की चेतावनी भी पुस्तक में दी गई है।
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