प्रदीप मालवीय, उज्जैन। उज्जैन में “सिंहस्थ 2028” महाकुंभ की तैयारियों को गति देने के लिए उज्जैन संभाग के 11 प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास एवं पुनरुद्धार की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है । इसके तहत 1100 करोड़ रुपये की लागत से श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार, आधारभूत संरचनाओं का विकास और मंदिर परिसरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा । योजना की खास बात यह है कि इसके लिए 200 करोड़ रुपये के टेंपल बॉन्ड जारी किए जाएंगे, जो देश में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है।

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संभागायुक्त आशीष सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में योजना को अंतिम रूप देने के लिए विस्तृत चर्चा की गई । बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, यूडीए सीईओ संदीप सोनी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे ।

बैठक में बताया गया कि 1100 करोड़ रुपये की परियोजना में 200 करोड़ रुपये टेंपल बॉन्ड के माध्यम से, 275 करोड़ रुपये अर्बन चैलेंज फंड से तथा 625 करोड़ रुपये बैंकों के माध्यम से जुटाए जाएंगे । टेंपल बॉन्ड की अवधि 10 वर्ष होगी । संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि 15 जुलाई तक सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर 31 जुलाई तक टेंपल बॉन्ड लॉन्च किए जाएं।

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योजना के अंतर्गत श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सांदीपनी आश्रम, नवग्रह मंदिर, 84 महादेव मंदिर, श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर, मां भूखी माता मंदिर, मां गढ़कालिका मंदिर, श्री सिद्धवट मंदिर के साथ ही मां आगर – मालवा स्थित बगलामुखी माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों का विकास किया जाएगा ।

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ 2028 महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना है । ऐसे में केवल महाकाल मंदिर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचेगी । इसी को ध्यान में रखते हुए सभी मंदिरों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है ।

कलेक्टर ने कहा कि टेंपल बॉन्ड के माध्यम से विकास कार्य कराए जाने से किसी भी संस्था या सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा और मंदिरों के विकास के लिए एक स्थायी वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी । उन्होंने इसे एक अभिनव और दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि देश में पहली बार इस मॉडल पर धार्मिक स्थलों के विकास का कार्य किया जा रहा है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है ।

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई यह योजना न केवल मंदिरों के स्वरूप को नया आयाम देगी, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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