प्रदीप मालवीय, उज्जैन। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महिदपुर के लोकप्रिय प्रधानाचार्य अर्जुन सिंह दावरे के अचानक किए गए ट्रांसफर के पीछे का असली सच अब खुलकर सामने आ गया है। इस कार्रवाई से आक्रोशित हजारों छात्राएं सड़कों पर उतर आईं और स्कूल के बाहर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर करीब 3 घंटे तक तेज धूप में बैठकर उग्र आंदोलन किया।
आंदोलन के दौरान स्कूल की ही एक छात्रा ने मीडिया के सामने आकर बेहद सनसनीखेज खुलासा किया। छात्रा ने आँखों देखा हाल बताते हुए कहा कि, स्कूल में दो लोग आए थे और वे प्राचार्य से बेहद अभद्र व्यवहार (गाली-गलौज) कर रहे थे। वे सीधे तौर पर प्राचार्य को धमका रहे थे कि तुमने मध्याह्न भोजन का ठेका किसी और को क्यों दे दिया, हमें क्यों नहीं दिया? अब देख लेना, हम तुम्हारा यहाँ से ट्रांसफर करवा देंगे।
हजारों छात्राएं भीषण धूप में करीब तीन घंटे तक सड़क जाम कर बैठी रहीं, लेकिन शुरुआती दौर में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा। मौके पर मौजूद पत्रकारों ने जब जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाया, तो कई के फोन लगातार व्यस्त आते रहे, तो कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक-दूसरे पर बात टालते नजर आए। बाद में जब मामले की गूंज वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तब जाकर नायब तहसीलदार और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मौके पर पहुंचे और बच्चियों की बात सुनी।
छात्राओं ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में कहा कि दावरे सर के कुशल मार्गदर्शन में स्कूल का शैक्षणिक स्तर तो सुधरा ही है, साथ ही उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूल में एक विशेष प्रोटेक्शन टीम (कमांडो ग्रुप) का भी गठन किया था। वार्षिक परीक्षाओं के इस महत्वपूर्ण समय में उनका जाना छात्राओं के भविष्य और सुरक्षा दोनों के साथ खिलवाड़ है।
प्राचार्य ने पूर्व में एक भ्रष्ट संस्था का ठेका निरस्त कर एक गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को काम सौंपा था, जो बच्चों को उत्कृष्ट भोजन दे रहा था। छात्राओं ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर प्राचार्य अर्जुन सिंह दावरे का स्थानांतरण निरस्त नहीं किया गया, तो यह आंदोलन आगे और भी उग्र रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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