धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के दो दिन बाद बड़ी खबर सामने आई है. दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र ने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन CJP उनके इस्तीफे पर अड़ी रही. जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों- जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों से कई घंटे तक इस मुद्दे पर बातचीत की थी.
सूत्रों से जानकारी मिली है कि धर्मेंद्र प्रधान के विभाग को बदलने की बात को नकारते हुए CJP इस्तीफे से कम पर बिल्कुल तैयार नहीं थी.
सरकार की ओर से आए वार्ताकारों का तर्क था कि मंत्री को पद से हटाना या उनका विभाग बदलना पूरी तरह से प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है. प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए 2 वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को मोर्चे पर लगाया गया था.
जब दिल्ली में शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का विरोध-प्रदर्शन जोरों पर था तो CJP के सामने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा गया था. हालांकि, सीजेपी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.
दोनों पक्षों के बीच 3 दौर की बातचीत हुई थी. लेकिन तीसरे दौर की बैठक के कुछ देर पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद बैठक में जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया गया.
जानकारी के मुताबिक, दूसरे दौर की बातचीत में CJP ने केंद्र सरकार से कहा था कि इस्तीफे की मांग से कोई समझौता नहीं हो सकता है. यदि इस मांग को जल्द स्वीकार नहीं किया गया, तो प्रदर्शन और व्यापक हो जाएगा.
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