चंडीगढ़। पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों की बेअदबी से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया को लेकर पंजाब ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन ने एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। ब्यूरो की ओर से राज्य के सभी पुलिस कमिश्नरों और सीनियर पुलिस कप्तानों को नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
ब्यूरो के डायरेक्टर एल.के. यादव द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, अब बेअदबी के मामलों की जांच के दौरान तैयार की जाने वाली केस डायरी और अन्य सभी कानूनी दस्तावेजों में किसी भी तरह के आम या अनुचित शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसकी जगह पुलिस विभाग द्वारा भेजे गए 52 विशेष और श्रद्धापूर्वक शब्दों का हू-ब-हू (उसी तरह) इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।


यह नया कदम हाल ही में 16 जून को जारी किए गए एक सर्कुलर का पालन करते हुए उठाया गया है। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बेअदबी जैसे बेहद संवेदनशील मामलों की पड़ताल पूरी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और वस्तुपरकता के साथ की जाए।

जांच के दौरान धार्मिक मर्यादा को ठेस न पहुंचने के सख्त आदेश

पंजाब ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन के डायरेक्टर जनरल ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि जांच के किसी भी चरण में संगत की धार्मिक भावनाओं को जरा भी ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। पुलिस की कार्रवाई या इस्तेमाल की गई भाषा का कोई भी हिस्सा पवित्र बाणी और स्वरूप के प्रति अनादर का कारण नहीं बनना चाहिए। पत्र में चेतावनी दी गई है कि ऐसी किसी भी लापरवाही के कारण राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और जनता का गुस्सा भड़क सकता है।

संशोधित सूची में शामिल किए गए 52 पवित्र शब्द

पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजे गए इस पत्र के साथ सिख रहित मर्यादा के तहत अनिवार्य धार्मिक प्रोटोकॉल को सुनिश्चित करने के लिए 52 श्रद्धापूर्वक शब्दों की एक संशोधित डिक्शनरी (शब्दावली) भी भेजी गई है। इससे पहले जारी किए गए संकलन में कुछ नए अहम शब्द भी जोड़े गए हैं, ताकि जांच अधिकारी जरूरत पड़ने पर तुरंत इसका सही इस्तेमाल कर सकें। इस नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद अब पुलिस अपनी सरकारी फाइलों में किसी भी सामान्य या बोलचाल के शब्द का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकेगी।

पुलिस ने नई गाइडलाइन में बताया शब्दों के इस्तेमाल का सही तरीका

नए नियमों के अनुसार, पवित्र ग्रंथ साहब को केवल कोई किताब या कॉपी लिखने की बजाय ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ या ‘पावन स्वरूप’ ही लिखा जाएगा।

इसी तरह अन्य शब्दों के लिए भी कड़े नियम तय किए गए हैं:

  • पेज या पन्ने की जगह ‘पावन अंग’ शब्द का इस्तेमाल होगा।
  • बाहरी हार्ड बाइंडिंग के लिए ‘जिल्द’ शब्द का इस्तेमाल करना होगा।
  • पवित्र ग्रंथ साहिब के प्रकाश करने और रात के समय विराजमान करने वाले स्थानों के लिए क्रमशः ‘प्रकाश स्थान’ और ‘सुखासन स्थान’ शब्दों का ही उपयोग किया जाएगा।

इसके अलावा गुटका साहिब, सेंची साहिब, नितनेम, पीढ़ा साहिब, रुमाला साहिब, चौर साहिब और ग्रंथी सिंह जैसे 52 खास धार्मिक शब्दों की पूरी लिस्ट जारी की गई है। इतना ही नहीं, पावन स्वरूपों की देखभाल करने वाले प्रबंधकों, सेवादारों और रक्षकों के लिए एक ‘सेवा यूनिक पहचान नंबर’ भी अलॉट करने की बात कही गई है।