चंडीगढ़। पंजाब में आज से गेहूं की सरकारी खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन खरीद के पहले ही दिन राज्य के आढ़ती अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। आढ़तियों द्वारा कमीशन में वृद्धि की मांग को लेकर किए जा रहे इस प्रदर्शन के कारण किसानों और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आढ़तियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि ब्लैकमेलिंग के जरिए मांगें मनवाने का तरीका सही नहीं है।
चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आढ़तियों की मांगें सीधे तौर पर केंद्र सरकार से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मैंने इस मुद्दे पर केंद्र को पत्र भी लिखे हैं और केंद्रीय बैठकों में भी यह मुद्दा उठाया है। पंजाब सरकार का आढ़तियों के साथ कोई विवाद नहीं है, लेकिन अगर वे यह सोच रहे हैं कि सीजन के समय धौण पर गोडा (गर्दन पर घुटना) रखकर या ब्लैकमेलिंग करके अपनी मांगें मनवा लेंगे, तो वे गलत हैं। अब यह गोडा रखने वाला समय बीत चुका है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केंद्र से पंजाब की फसल उठाने और आढ़तियों की समस्याओं पर बात करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वे आज आढ़तियों से मुलाकात जरूर करेंगे, लेकिन जो चीजें राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं, उनका समाधान तुरंत संभव नहीं है।
क्यों हड़ताल पर हैं आढ़ती?
आढ़तियों की मुख्य मांग प्रति क्विंटल मिलने वाले कमीशन में वृद्धि करना है।
आढ़तियों का कहना है कि 2020 तक उन्हें लगभग 2.5% कमीशन मिलता था। इस साल गेहूं का MSP 2585 प्रति रूपए क्विंटल है, जिसके हिसाब से कमीशन 65 रूपए होना चाहिए, लेकिन उन्हें वर्तमान में बहुत कम मिल रहा है। वे आढ़तियों को ईपीएफ (EPF) नियमों के दायरे से बाहर रखने और जारी किए गए नोटिसों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

आढ़तियों के अनुसार, साल 2018-19 के बाद से कमीशन के रेट में उचित वृद्धि नहीं हुई है। पहले यह 46 रूपए था, जिसे हाल ही में बढ़ाकर 50.75 किया गया है, जो उनकी नजर में नाकाफी है।
- प्रशांत किशोर ने दूसरे राउंड में भी बना रखी है अपनी लीड, 1161 वोटों से आगे, जानें कौन कितने वोट से पीछे
- मकान वापस लो, पैसा लौटाओ… न पानी-न स्ट्रीट लाइट और न सीसीटीवी, श्रीराम रेसिडेंसी में रहवासियों का फूटा गुस्सा
- घर के मुख्य द्वार पर ये चीजें होने से आता है दुर्भाग्य, बढ़ने लगता है कर्ज …
- WhatsApp की एक सेटिंग बदलते ही बच सकती है कई GB स्टोरेज, जानें आसान तरीका
- 2 हजार करोड़ का राजस्व देने वाला ‘ऊर्जाधानी’ लाचारः खाट और बाइक पर उठानी पड़ रही लाशें


