कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास, 10 सर्कुलर रोड को लेकर जारी विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। भवन निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा 14 जून को समाप्त हो चुकी है, बावजूद इसके राबड़ी देवी ने अभी तक बंगला खाली नहीं किया है। इस स्थिति ने सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है।

​विवाद का घटनाक्रम और नोटिस

​राबड़ी देवी को यह बंगला 2005 में सत्ता से हटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में आवंटित किया गया था। तब से वे लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ यहीं रह रही हैं। सरकार ने उन्हें नया बंगला (39 हार्डिंग रोड) आवंटित करते हुए 10 सर्कुलर रोड खाली करने का निर्देश दिया था।
​इस प्रक्रिया की शुरुआत 25 नवंबर 2025 को हुई थी। लंबी खींचतान के बाद 30 मई को विभाग ने अंतिम नोटिस जारी कर 15 दिनों की मोहलत दी। सांसद मीसा भारती ने भी 7 जून को बंगला खाली करने का आश्वासन दिया था, लेकिन डेडलाइन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

​राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और चुनौती

​यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूर्णतः राजनीतिक हो चुका है। राबड़ी देवी ने स्पष्ट तौर पर सरकार को चुनौती दी है कि वे स्वयं बंगला खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार चाहे तो बल का प्रयोग कर सकती है। वहीं भवन निर्माण विभाग ने इस बंगले को वर्तमान पशुपालन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया है।
​इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। प्रशांत किशोर (PK) ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि राबड़ी देवी बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं, जिसके नाते उन्हें आवास मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला सरकार और राबड़ी देवी के बीच का है।

​सरकार के सामने आगे की राह

​अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती है। प्रशासन के पास अब दो ही विकल्प शेष हैं: या तो सरकारी नियमों के पालन के लिए बल का उपयोग किया जाए या फिर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को और कड़ा किया जाए।
​राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल सभी की निगाहें भवन निर्माण विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार बल का प्रयोग कर इसे खाली कराएगी या मामला अदालती मोड़ लेगा।